April 18, 2026

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महाशिवरात्रि; जब अंधेरा भी बन जाता है उजियारा

झलक शिकारी

डमरू की थाप-सा धड़कता है आज का आसमान,
रात के सन्नाटे में भी गूंज रहा है एक अनजान सा गान।
चारों ओर गूंज है महाकाल की जय घोष की…….।

यह वह लो है जो दीपों से नहीं, भीतर जलते संकल्पों से रोशन होती है। यह रात शोर नहीं करती, यह आत्मा के दरवाज़े पर दस्तक देती है।
आज की रात मात्र एक धार्मिक तिथि नहीं है। आज की रात ” महा+शिव+रात्रि” एक प्रतीक है।
प्रतीक उसे पल का, जब इंसान भीड़ से हटकर खुद की खोज करता है।
मंदिरों में भीड़ होगी, घंटियों की आवाज होगी, “हर हर महादेव” की जयकारे गूंजेंगे।
लेकिन असली सवाल यह है- क्या हम सच के मार्ग पर चल रहे हैं?

भगवान शिव विरोधों का संगम है।
शिवजी का स्वरूप हमने देखा है। जटा में बहती गंगा, गले में नाग, शरीर पर भस्म, और माथे पर शांत चंद्रमा।
लेकिन क्या कभी मंथन किया है कि यह सब क्या कहता है?
भगवान शिव जीवन‌ का सबसे‌ बड़ा संदेश देते है- सुंदरता सादगी में है, शक्ति संयम में है, और विजय अपने ऊपर जीत में है।
वे पर्वत के वासी है, पर ह्रदय के भी स्वामी है।
वे संन्यासी है, पर सबसे बड़े गृहस्थ भी।
उनका यह स्वरूप कहता है- “जीवन में संतुलन ही सबसे बड़ी साधना है।”

तांडव जो विनाश नहीं, परिवर्तन का प्रतीक है।
लोग तांडव को सिर्फ विनाश मान लेते हैं। पर तांडव तो वह नृत्य है जो पुराने को हटाकर नए का सृजन करता है।
कभी-कभी हमें भी अपने भीतर, अहंकार का तांडव करना पड़ता है, डर का‌ तांडव करना पड़ता है,
ताकि आत्मविश्वास जन्म ले सकें।
और शायद यही महाशिवरात्रि का सबसे बड़ा संदेश है- टूटना अंत नहीं, परिवर्तन की शुरुआत है।

मेरे लिए यह सिर्फ व्रत रखने की रात नहीं, यह खुद से वादा करने की रात है।
वादा कि-
अब शिकायत कम, स्वीकृति ज्यादा होगी।
अब क्रोध कम, करुणा ज्यादा होगी।
अब भ्रम कम, खुद पर भरोसा ज्यादा होगा।

जब “हर हर महादेव” का स्वर गूंजता है, तो लगता है जैसे भीतर कोई शक्ति जाग रही हो- जो‌ कहती है, “डर‌‌ मत, तू अकेला नहीं है।”

महाशिवरात्रि हमें याद दिलाती है कि जीवन एक निरंतर साधना है। अगर भीतर शांति है, तो बाहर का शोर भी संगीत बन जाता है।
तो इस बार शिवलिंग पर जल चढ़ाओ, तो साथ में अपने मन का बोझ भी उतार देना। क्योंकि शिव बाहर मंदिर में नहीं, शिव वही बसते हैं- जहां हम सच्चे मन से खुद को स्वीकार लेते है।
शिव शिवालयों से दिल तक बसते है,
दर्शन तो आंखें बंद कर भी हो सकते है।
पहचानने में खुद का संकल्प मन में,
शिव भस्म उतार सेहरे में सजते है।
देने संदेश निर्माण का, प्रकृति से मिलन का,
शिव तांडव से लेकर महाकालेश्वर में,
वहां से लेकर संसार के हर कण में बसते है।

हर‌ हर महादेव

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