देश के तमाम वन्य अभयारण्यों और चिड़ियाघरों में जहां लगातार हो रही मौतों के चलते वन्य प्राणियों की संख्या में गिरावट आ रही है, वहीं मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर का कमला नेहरू प्राणी उद्यान इसके बिल्कुल उलट एक अनोखी सफलता की कहानी लिख रहा है। यह जू भारतीय और विदेशी वन्य पशु-पक्षियों के लिए एक आदर्श ब्रीडिंग हब बनकर उभरा है, जिसके चलते यहाँ वन्य जीवों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। यही वजह है कि देश के अन्य बड़े चिड़ियाघरों और सेंचुरी से एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत इंदौर जू के वन्य जीवों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है।
🦜 169 प्रजातियों और 1350 वन्य जीवों का आशियाना, अमेरिका-अफ्रीका के दुर्लभ पक्षी भी शामिल
इंदौर का कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय देश का एकमात्र ऐसा लघु श्रेणी का चिड़ियाघर है, जहाँ 169 अलग-अलग प्रजातियों के कुल 1350 वन्य जीव सुरक्षित माहौल में रह रहे हैं। यहाँ पक्षियों और सरीसृप वर्ग के ऐसे दुर्लभ प्राणी भी मौजूद हैं जिन्हें विलुप्त होने से सफलतापूपर्ब बचाया गया है। इस संग्रहालय की विशेषता यह है कि यहाँ अमेरिका, अफ्रीका, ब्राजील और दक्षिणी महाद्वीपों से लाए गए दुर्लभ पक्षी भी पूरी तरह अनुकूलित होकर लगातार ब्रीडिंग कर रहे हैं। यहाँ सफेद टाइगर, रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाई शेर, तेंदुए, हिप्पो, एनाकोंडा, ऑस्ट्रिच और क्रोकोडाइल जैसे तमाम खतरनाक और आकर्षक वन्यजीव सैलानियों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हैं।
🌿 तनावमुक्त और प्राकृतिक माहौल, टाइगर और शेरों की संख्या क्षमता से तीन गुना अधिक
चिड़ियाघर की शानदार व्यवस्थाओं का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ टाइगर और एशियाई शेरों की संख्या वर्तमान क्षमता से तीन गुनी हो चुकी है। चिड़ियाघर के प्रभारी डॉ. उत्तम यादव का कहना है कि देश के अन्य 180 चिड़ियाघरों में कोई भी ऐसा लघु श्रेणी का जू नहीं है जहाँ इंदौर के बराबर वन्यजीवों की संख्या और विविधता हो। करीब 51 एकड़ के विस्तृत परिसर में हर पशु-पक्षी के खान-पान और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जाता है। यही तनावमुक्त और स्वस्थ वातावरण इस बात का प्रमाण है कि इंदौर जू आज देश भर के वन्य प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए एक मिसाल बन चुका है।

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