भारतीय रेलवे स्टेशनों को विश्व स्तरीय और आधुनिक यात्री सुविधाओं से लैस करने के बड़े-बड़े दावों के बीच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने जमीनी हकीकत का पर्दाफाश कर दिया है। देश के 16 रेलवे जोन के 512 बड़े गैर-उपनगरीय (Non-Suburban) स्टेशनों की कैग द्वारा की गई विशेष जांच में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का रेलवे स्टेशन भी उन स्टेशनों की सूची में शामिल मिला, जहाँ एक साथ कई जरूरी यात्री सुविधाओं में गंभीर कमियां दर्ज की गई हैं। एनएसजी-2 (NSG-2) श्रेणी के इस महत्वपूर्ण स्टेशन पर पेयजल, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, शौचालय, पंखे, वाटर कूलर और डस्टबिन जैसी छह बुनियादी सुविधाएं निर्धारित मानकों पर बिल्कुल खरी नहीं उतरीं। हालांकि, इसी जांच में राहत भरी खबर यह रही कि मध्य प्रदेश का इंदौर स्टेशन सभी निर्धारित न्यूनतम सुविधाओं के मामले में पूरी तरह मानकों पर खरा उतरा है।
📊 देश के 512 स्टेशनों में से केवल 54 स्टेशन ही निकले पूरी तरह मानकों पर खरे
कैग (CAG) ने वर्ष 2019 से 2024 के बीच देश भर के 16 रेलवे जोन से जुड़े 512 चयनित गैर-उपनगरीय स्टेशनों का विस्तृत ऑडिट किया है। देश भर में इस श्रेणी के कुल 5,908 स्टेशन हैं, जिनमें मुख्य रूप से भारी यात्री दबाव वाले एनएसजी-1 और एनएसजी-2 श्रेणी के स्टेशनों को चुना गया था। इस व्यापक जांच में चौंकाने वाला सच यह सामने आया कि देश भर में सिर्फ 54 स्टेशन ही ऐसे पाए गए, जहाँ जांची गई सभी न्यूनतम आवश्यक यात्री सुविधाएं पूरी तरह मानकों के अनुरूप थीं। भोपाल स्टेशन जो कि एनएसजी-2 श्रेणी में आता है और जिसे वर्तमान में ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत संवारा जा रहा है, वहाँ भी यात्रियों की रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ी छह बुनियादी सुविधाओं में भारी खामियां पाई गईं।
📉 प्रदेश के अन्य बड़े स्टेशनों का हाल और बजट से 102% अधिक खर्च का खुलासा
भोपाल के अलावा मध्य प्रदेश के अन्य प्रमुख रेलवे स्टेशनों की स्थिति भी सवालों के घेरे में आई है। जबलपुर स्टेशन पर पीने के पानी के नलों की उपलब्धता में कमी दर्ज की गई, ग्वालियर में प्लेटफार्म शेल्टर, यूरिनल और पंखों से जुड़ी कमियां सामने आईं, जबकि रतलाम में पंखों की संख्या निर्धारित मानकों से कम पाई गई। कैग ने स्टेशनों पर नल, प्रतीक्षालय, बैठने की व्यवस्था, शेल्टर, शौचालय, उच्चस्तरीय प्लेटफार्म, पंखे, फुटओवर ब्रिज, घड़ी, उद्घोषणा प्रणाली और डस्टबिन सहित कुल 16 जरूरी यात्री सुविधाओं को जांच की कसौटी बनाया था।
इसके अलावा, रिपोर्ट में लिनेन प्रबंधन (Linen Management) के खर्च को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है। सभी 16 रेलवे जोन ने स्वीकृत बजट से काफी अधिक राशि खर्च की है, जिसमें पश्चिम मध्य रेलवे ने तो स्वीकृत बजट से 102 प्रतिशत ज्यादा राशि खर्च कर डाली। पश्चिम मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी मधुर वर्मा ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि कैग द्वारा ऑडिट की गई कमियों में से कई को दूर किया जा चुका है और बाकी बचे विकास कार्यों के लिए भी स्वीकृति मिल चुकी है, जिनके पूरा होने के बाद यात्रियों को विश्व स्तर की बेहतर सुविधाएं मिलने लगेंगी।

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