मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में शासन के आदेशों की अवहेलना करने और ‘स्वामित्व योजना’ के कार्यों में लापरवाही बरतने वाले पटवारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने कार्रवाई करते हुए 11 स्थायी पटवारियों को निलंबित कर दिया है, जबकि 32 प्रोविजनल ( probationary ) पटवारियों को सेवा से हटाने के अंतिम नोटिस जारी कर दिए हैं। बता दें कि प्रदेश के कई जिलों में पटवारी स्वामित्व योजना के तहत उन्हें ‘निष्पादक’ (Executant) बनाए जाने का खुलकर विरोध कर रहे थे।
📋 कार्रवाई का दायरा बढ़ा: 25 अन्य पटवारियों को भी थमाया गया नोटिस
जिला प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, स्वामित्व योजना के कार्यों में लगातार उदासीनता बरतने पर गुरुवार को 6 और नियमित पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया, जिससे सस्पेंड होने वाले कुल स्थायी पटवारियों की संख्या 11 हो गई है। इसके अलावा, 25 अन्य नियमित पटवारियों को भी निलंबन के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। प्रशासन द्वारा इन बर्खास्त और निलंबित पटवारियों के बस्ते वापस लेने की प्रक्रिया भी तेजी से शुरू कर दी गई है।
🏘️ क्या है स्वामित्व योजना और क्यों हो रहा है विवाद?
केंद्र और राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत ग्रामीण आबादी भूमि का आधुनिक ड्रोन सर्वे किया जाता है, जिससे संपत्तियों का सटीक नक्शा और रिकॉर्ड तैयार होता है। सरकार बिना किसी स्टाम्प ड्यूटी या पंजीयन शुल्क के नागरिकों को इसकी पंजीकृत डीड सौंप रही है। हालांकि, पटवारी संघ का तर्क है कि लीज डीड या रजिस्ट्री में उन्हें बतौर ‘निष्पादक’ शामिल किए जाने से भविष्य में किसी भी भूमि विवाद की स्थिति में उन पर अनावश्यक विधिक और विभागीय जोखिम आ सकता है, जिसके चलते वे इसका विरोध कर रहे हैं।

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