August 23, 2026

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Madhya Pradesh Nursing News: 22 सरकारी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता पर फिर उठा सवाल, फर्जी और कूट रचित दस्तावेज पेश करने का आरोप

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेजों का मामला एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है। सीबीआई जांच के बाद अब यह पूरा प्रकरण दोबारा अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने गंभीर आरोप लगाते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है कि प्रदेश के 22 सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में फैकल्टी की भारी कमी को बिना पूरा किए ही उन्हें शैक्षणिक सत्र की मान्यता दे दी गई है। स्थिति यह है कि इनमें से 6 सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में तो नियमित प्रिंसिपल ही नहीं हैं, जबकि 10 सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में वाइस प्रिंसिपल के पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा 15 से ज्यादा कॉलेजों में एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसरों की भी भारी कमी बनी हुई है।

📋 फर्जी और कूट रचित दस्तावेज पेश करने का गंभीर आरोप, सत्र 2026-27 के लिए मिली है मान्यता

एनएसयूआई के स्टेट वाइस प्रेसिडेंट रवि परमार ने आरोप लगाया है कि सत्र 2026-27 की मान्यता हासिल करने के लिए कई सरकारी नर्सिंग कॉलेजों ने प्राचार्य, उप-प्राचार्य और प्रोफेसरों से जुड़े फर्जी व कूट रचित (फर्जी) दस्तावेज शासन के समक्ष पेश किए थे। आवेदन के दौरान कमियों को दरकिनार कर मान्यता जारी कर दी गई। जिन चुनिंदा कॉलेजों को मान्यता नहीं मिली, उनमें भोपाल का बीएमएचआरसी नर्सिंग कॉलेज, अमरकंटक विश्वविद्यालय का अनूपपुर शासकीय नर्सिंग कॉलेज और दतिया का शासकीय नर्सिंग कॉलेज शामिल हैं। एनएसयूआई का कहना है कि जब कॉलेजों में पढ़ाने के लिए पर्याप्त ट्यूटर, प्रोफेसर और वक्ता ही नहीं होंगे, तो छात्र-छात्राओं का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा। पूर्व में भी सरकार को इन कमियों को दूर करने के लिए आवेदन दिया गया था, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ।

🔍 सीबीआई जांच के बाद भी हालात सिफर, नियमों के विपरीत हो रहा संचालन

एनएसयूआई ने याद दिलाया कि माननीय न्यायालय के सख्त निर्देशों पर सीबीआई पहले ही प्रदेश के तमाम सरकारी और निजी नर्सिंग कॉलेजों की विस्तृत जांच कर चुकी है। सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से माना था कि अधिकांश कॉलेजों में मानदंडों के अनुसार प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल और अन्य बुनियादी सुविधाएं व फैकल्टी मौजूद नहीं हैं। इसके बावजूद व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं हुआ।

मध्य प्रदेश शासन के नर्सिंग कॉलेज मान्यता नियम 2018 के प्रावधानों के मुताबिक, केवल 30 सीटों के लिए भी एक प्राचार्य, 1 उप-प्राचार्य, 2 एसोसिएट प्रोफेसर, 3 असिस्टेंट प्रोफेसर या 3 ट्यूटर होना अनिवार्य होता है। यदि सीटों की संख्या बढ़ाई जाती है, तो स्टाफ में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी का नियम है, लेकिन कई कॉलेजों में सीटों का दायरा तो बढ़ा दिया गया, मगर जमीनी स्तर पर फैकल्टी की नियुक्ति नहीं की गई। इसी मनमानी के खिलाफ अब एक बार फिर न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया है।

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