मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के आदिवासी बहुल ब्लॉक खकनार के अंतर्गत आने वाले ग्राम देवी फाल्या के सरकारी स्कूल से शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाली एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। इस प्राथमिक स्कूल की वर्तमान स्थिति को देखकर कोई भी इसे स्कूल कहने के बजाय किसी खंडहर या कबाड़खाना समझने की भूल कर बैठेगा। स्कूल के अंदर पसरी बदहाली और शिक्षा की गिरती गुणवत्ता को लेकर अब स्थानीय अभिभावकों (पालकों) का गुस्सा फूट पड़ा है। पालकों ने विद्यालय में पदस्थ शिक्षकों पर पढ़ाने के प्रति भारी लापरवाही बरतने और गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँचने के बाद उन्होंने जांच का आश्वासन दिया है, वहीं आक्रोशित पालकों ने लापरवाह शिक्षकों को तुरंत हटाने और उनकी जगह योग्य शिक्षकों की पदस्थापना की पुरजोर मांग की है।
🏚️ स्कूल है या कबाड़खाना? एक ही कमरे में पहली से पांचवीं तक की पढ़ाई और बुनियादी सुविधाओं का टोटा
मध्य प्रदेश सरकार भले ही ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में शिक्षा के प्रसार के लिए लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती हो, लेकिन जमीनी स्तर पर तैनात कुछ लापरवाह शिक्षकों और महकमे की उदासीनता के कारण सरकारी योजनाएं कागजों तक सिमट कर रह जाती हैं। देवी फाल्या की इस प्राथमिक शाला में कक्षाओं के नाम पर सिर्फ अव्यवस्था और गंदगी का अंबार नजर आता है। स्कूल के कमरों में भारी कबाड़ भरा हुआ है, और इसी कबाड़ के बीच आदिवासी वर्ग के मासूम बच्चे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। इस प्राथमिक विद्यालय में कक्षा पहली से पांचवीं तक कुल 17 बच्चे दर्ज हैं, और हैरानी की बात यह है कि ये सभी बच्चे एक ही छोटे से कमरे में बैठने को विवश हैं। शिक्षकों की मनमानी के कारण बच्चे भी अब स्कूल जाने से कतराने लगे हैं, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। बच्चों ने तो यहां तक शिकायत की है कि कई बार शिक्षक शराब के नशे में स्कूल पहुंचते हैं।
🚰 न शौचालय है, न पीने का पानी—दो शिक्षकों के भरोसे चल रहा है स्कूल
स्थानीय पालक मदन रावत और दुर्गेश सोलंकी ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि स्कूल की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। विद्यालय परिसर में न तो बच्चों के लिए शौचालय की कोई व्यवस्था है और न ही पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध है। स्कूल का भवन और मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) कक्ष भी पूरी तरह जर्जर हो चुका है। इस स्कूल में कुल 2 शिक्षक पदस्थ हैं—एक प्रधानपाठक और एक प्राइमरी शिक्षक—लेकिन इनमें से एक शिक्षक कभी-कभार ही स्कूल आते हैं।
इस संबंध में जब शिक्षक संतोष राठौर से बात की गई, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि स्कूल में पांचवीं कक्षा में केवल 3 ही बच्चे दर्ज हैं, और जर्जर भवन की समस्या को लेकर कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को लिखा जा चुका है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं, खकनार के बीआरसी कृष्णकुमार पाराशर ने कहा कि मीडिया के माध्यम से पूरा मामला उनके संज्ञान में आया है, वे इसकी निष्पक्ष जांच करवाएंगे और दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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