जबलपुर। हमारे आसपास ऐसे कई बच्चे और नागरिक हैं, जो सुन और बोल नहीं पाते। संवादहीनता और सामाजिक अज्ञानता की वजह से उन्हें अपनी बात दूसरों तक पहुँचाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। विशेष तौर पर आम लोगों को सांकेतिक भाषा (Sign Language) का ज्ञान न होने के कारण श्रवण बाधित व्यक्तियों को दुकान, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक स्थलों पर रोजमर्रा की जिंदगी में काफी मानसिक व व्यावहारिक परेशानियां उठानी पड़ती हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार मध्य प्रदेश में लगभग 2.67 लाख श्रवण बाधित दर्ज किए गए थे। वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 3.15 लाख से अधिक होने का अनुमान है।
🏫 समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल: बीएड और एमएड के छात्र-शिक्षकों को सिखाए जा रहे बेसिक्स
मध्य प्रदेश में समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) को मजबूत करने के उद्देश्य से जबलपुर स्थित ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड लर्निंग इन एजुकेशन’ में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला में बीएड (B.Ed) और एमएड (M.Ed) की पढ़ाई कर रहे भावी शिक्षकों के साथ-साथ अनुभवी शिक्षकों को भी साइन लैंग्वेज के बुनियादी गुर सिखाए गए। समावेशी शिक्षा अभियान के संभागीय प्रभारी डॉ. रामनरेश पटेल ने बताया, “श्रवण बाधित लोग समाज का अभिन्न अंग हैं। यदि सामान्य शिक्षकों और आम लोगों को साइन लैंग्वेज की बेसिक जानकारी होगी, तो विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की मदद करना और उनसे संवाद साधना बेहद आसान हो जाएगा।”
🗣️ ‘हर बच्चे को साइन लैंग्वेज सिखाने पर जोर’: विशेषज्ञ रोहिणी ठाकुर ने बताया अभ्यास का महत्व
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान साइन लैंग्वेज विशेषज्ञ रोहिणी ठाकुर ने सांकेतिक भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि साइन लैंग्वेज केवल श्रवण बाधित बच्चों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि सामान्य बच्चों को भी इसका प्राथमिक ज्ञान दिया जाना चाहिए ताकि वे भविष्य में ऐसे व्यक्तियों की संवेदनशीलता के साथ मदद कर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि साइन लैंग्वेज कोई कठिन भाषा नहीं है और नियमित अभ्यास से इसे आसानी से सीखा जा सकता है। भारत सरकार द्वारा भी इसके लिए डिजिटल वीडियो सामग्री उपलब्ध कराई गई है।
🎒 सामान्य स्कूलों में पढ़ेंगे श्रवण बाधित बच्चे: सरकारी स्तर पर शिक्षकों को किया जा रहा तैयार
समावेशी शिक्षा से जुड़ी डॉ. राजकुमारी दुबे ने बताया कि सरकार की प्राथमिकता है कि श्रवण बाधित बच्चों को अलग-अलग थलग करने के बजाय सामान्य स्कूलों में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराई जाए।
इसके लिए स्कूलों में साइन लैंग्वेज के जानकार शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। एमएड छात्र प्रदीप कुमार तिवारी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण से शिक्षकों में एक नई दक्षता विकसित होगी, जिसे वे आगे चलकर अपने विद्यार्थियों तक भी पहुँचा सकेंगे।
🌐 कई जिलों के शिक्षक हुए शामिल: स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं की भी दी गई जानकारी
इस वृहद प्रशिक्षण शिविर में जबलपुर के अलावा सिवनी, नरसिंहपुर, कटनी और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में शिक्षकों ने सहभागिता की।
कार्यशाला के दौरान शिक्षकों को श्रवण बाधित बच्चों व युवाओं के लिए संचालित केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की भी जानकारी दी गई। युवाओं के लिए केवल पेंशन ही नहीं, बल्कि ‘PM-DAKSH’ योजना के तहत कौशल प्रशिक्षण, ‘NDFDC’ के माध्यम से रियायती ऋण और ‘RPwD Act’ के अंतर्गत सरकारी नौकरियों में आरक्षण के प्रावधानों से अवगत कराया गया। मध्य प्रदेश के इंदौर में साइन लैंग्वेज शिक्षक बनने के लिए सरकारी डिप्लोमा व डिग्री प्रोग्राम भी संचालित किए जा रहे हैं।

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