मध्य प्रदेश में ‘नशा मुक्त मध्य प्रदेश’ के संकल्प को साकार करने के लिए प्रशासनिक कसावट तेज कर दी गई है। राज्य सरकार ने इस अभियान को एक बड़े मिशन के रूप में लिया है, जिसके तहत अब हर महीने जिला स्तर पर नियमित रूप से समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उच्चस्तरीय बैठक के दौरान प्रदेश के तमाम प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि बड़े शहरों और उनके संवेदनशील ‘हॉट स्पॉट’ वाले इलाकों पर विशेष रूप से कड़ी निगरानी रखी जाए, ताकि अवैध नशे के कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।
🎯 इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों पर फोकस, पुलिस और आबकारी विभाग को संयुक्त कार्रवाई के निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जिला कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षकों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, और राज्य में भी इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि पुलिस और आबकारी विभाग आपसी तालमेल के साथ आवश्यकतानुसार संयुक्त कार्रवाई करने से पीछे न हटें। इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और सागर जैसे महानगरों में नशे के अवैध अड्डों और हॉट स्पॉट्स को चिन्हित कर सख्त एक्शन लेने को कहा गया है।
📊 एनडीपीएस एक्ट के तहत इस साल दर्ज हुए 2700 से ज्यादा मामले, अगस्त 2026 तक हजारों किलो मादक पदार्थ जब्त
बैठक के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने इस संबंध में एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण (Presentation) भी दिया। आंकड़ों के अनुसार, मादक पदार्थों के उत्पादन, अवैध व्यापार, सेवन और तस्करी पर लगाम कसने के लिए एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत इस वर्ष प्रदेश भर में कुल 2706 मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए अगस्त 2026 तक 3690 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से कुल 46,313 किलो मादक पदार्थ भी जब्त किए गए हैं।
🏫 शिक्षण संस्थानों के आसपास सख्त पहरा, ‘नशा मुक्त मित्र’ और हेल्पलाइन नंबर 14446 के जरिए जागरूकता पर जोर
अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि प्रतिबंधित कफ सिरप के अवैध भंडारण और बिक्री पर रोक लगाने के साथ-साथ सभी शिक्षण संस्थानों के 500 मीटर के दायरे को ‘ड्रग फ्री कैंपस’ बनाने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा समाज के विभिन्न वर्गों से ‘नशा मुक्त मित्रों’ का सहयोग लिया जा रहा है और जिलों में नशा मुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली को अधिक सक्रिय बनाया गया है। आम जनता की सहायता के लिए ‘नशा मुक्त हेल्पलाइन 14446’ की व्यवस्था भी सुचारू रूप से लागू की गई है, ताकि लोग बिना किसी संकोच के अवैध गतिविधियों की सूचना प्रशासन तक पहुंचा सकें।

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