August 23, 2026

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Katni Corruption News: जमीन रजिस्ट्री और हत्या के मामले में घिरीं निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया, महकमे में मचा हड़कंप

मूल रूप से राजगढ़ जिले की पचोर तहसील से ताल्लुक रखने वाली निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया का सफर काफी संघर्ष भरा और दिलचस्प रहा है। एक सामान्य मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखने वाली नेहा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजगढ़ से पूरी की। इसके बाद एविएशन में डिप्लोमा हासिल कर वह एयर इंडिया में एयर होस्टेस के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। हालांकि, इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का मन बनाया और वर्ष 2012 से 2015 तक कड़ा संघर्ष करते हुए एमपीपीएससी (MPPSC) की तैयारी की। साल 2016 के परिणामों में उन्होंने पूरे प्रदेश में 20वीं रैंक हासिल कर सीएसपी का पद प्राप्त किया था। सीएसपी बनने से कुछ समय पहले उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग में भी अपनी सेवाएं दी थीं। उनकी पहली पोस्टिंग गुना जिले में हुई थी, जहां आईजी से विवाद के चलते उनका ट्रांसफर हुआ था। कोरोना काल के दौरान देशभक्ति गीतों पर डांस कर लोगों को मोटिवेट करने पर उन्हें सम्मानित भी किया गया था। इसके बाद वह पीएचक्यू और खंडवा में तैनात रहीं और वर्ष 2025 में उनका तबादला कटनी सीएसपी के रूप में किया गया था।

🚨 कटनी का सीएसपी पद रहा है हमेशा चर्चा में, महकमे में मचा भारी हड़कंप

कटनी का सीएसपी पद पिछले कुछ समय से लगातार देशभर में सुर्खियों और विवादों में बना हुआ है। नेहा पच्चीसिया से पहले ख्याति मिश्रा यहां सीएसपी थीं, जिनका पुलिस अधीक्षक अभिजीत रंजन के साथ नजदीकी और बाद में उपजे विवाद के कारण सीएसपी बंगले में ही उनके पूरे परिवार के साथ पुलिस मारपीट का मामला सामने आया था। उस समय भी एसपी के तबादले और विभागीय जांच के बाद सीएसपी को हटाया गया था। अब नेहा पच्चीसिया के कार्यकाल में भी इसी कुर्सी पर बैठकर गंभीर आपराधिक और भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। इस पूरे प्रकरण में हत्या की जांच और जमीन खरीदी में सहयोग करने वाले एसआई सौरभ सोनी, रीडर नरेंद्र पांडे, आरक्षक मट्टू और चालक केशव सिंह को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। जांच का दायरा बढ़ने से जिले के अन्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

⛓️ बंगले में दो दिन बंधक बनाकर रखी थी पीड़ित पक्ष की लाश या जमीन—सरकारी गाड़ी से कराई रजिस्ट्री और मांगे 75 लाख

जबलपुर आईजी द्वारा कराई गई शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि निलंबित सीएसपी ने पीड़ित रमेश लोधी (निवासी कन्हवारा) को रंगनाथ नगर थाने में रखने के साथ-साथ अपने शासकीय आवास (बंगले) में पूरे दो दिनों तक अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा था। जिस दिन जमीन की रजिस्ट्री होनी थी, उस दिन पीड़ित डर के मारे भाग न जाए या किसी से शिकायत न कर बैठे, इसलिए उसे सीएसपी ने अपनी खुद की सरकारी गाड़ी में बैठाकर रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचाया था।

जब जमीन से हाथ धोने के बाद पीड़ित ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई और पटवारी के पास नामांतरण रोकने का आवेदन दिया, तो सीएसपी ने रमेश पर दर्ज एक पुराने हत्या के मामले का डर दिखाया। सीएसपी ने उसे धमकी दी कि यदि वह जेल की सलाखों से बचना चाहता है, तो उसे 75 लाख रुपये और देने होंगे। साथ ही यह भरोसा भी दिया गया था कि रकम मिलने पर कोर्ट में बयान बदलवाकर उसे बरी करा दिया जाएगा। जब पीड़ित ने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया, तो सीएसपी ने रमेश और उसके दामाद को झूठे मुकदमे में उलझाकर जेल भिजवा दिया। वर्तमान में पुलिस इस पूरे सनसनीखेज मामले की परतें उघाड़ने में जुटी हुई है।

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