August 23, 2026

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Jabalpur HC Update: रेलवे टिकटों के गबन मामले में नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा- विभागीय जांच से आपराधिक जवाबदेही तय नहीं होती

मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) ने रेलवे में हुए लाखों रुपये के गबन के एक मामले में आरोपी महिला अधिकारी को तगड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सार्वजनिक धन के गबन और आपराधिक षड्यंत्र जैसे गंभीर मामलों में अग्रिम जमानत आसानी से नहीं दी जा सकती। रेलवे की चीफ बुकिंग सुपरवाइजर भावना राय की ओर से अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसमें तर्क दिया गया था कि जिस अवधि में गबन हुआ, वह अवकाश पर थीं और इस मामले में विभागीय जांच में किसी अन्य को दोषी पाया गया है। हालांकि, जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया।

🎫 इटारसी रेलवे स्टेशन पर हुआ था 4.47 लाख रुपये से अधिक का गबन

यह पूरा मामला इटारसी रेलवे स्टेशन से जुड़ा हुआ है, जहाँ 5 दिसंबर 2024 से 6 दिसंबर 2024 के बीच रेलवे टिकटों की बिक्री से प्राप्त कुल 4,47,706 रुपये की राशि का गबन किया गया था। इस वित्तीय अनियमितता की रिपोर्ट घटना के एक साल बाद 15 जनवरी 2026 को दर्ज कराई गई थी। इस मामले में असिस्टेंट चीफ बुकिंग सुपरवाइजर कुमारी रिंकी पटेल, चीफ बुकिंग सुपरवाइजर भावना राय और स्टेशन मैनेजर अनिल कुमार राय को आरोपी बनाया गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए भावना राय ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और दलील दी थी कि उनकी मासिक सैलरी एक लाख रुपये से अधिक है, ऐसे में वे महज साढ़े चार लाख रुपये के लिए अपने करियर, पेंशन और सामाजिक प्रतिष्ठा को दांव पर क्यों लगाएंगी।

🏛️ “विभागीय जांच और आपराधिक जांच अलग-अलग क्षेत्र हैं”—हाईकोर्ट की दो टूक

सुनवाई के दौरान शासन के वकीलों ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह अपराध रेलवे कर्मचारियों की पूर्व नियोजित और आपसी मिलीभगत से अंजाम दिया गया था। याचिकाकर्ता के अवकाश पर होने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि उनका इस षड्यंत्र से कोई लेना-देना नहीं है।

हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि अग्रिम जमानत पर सुनवाई के दौरान सबूतों का विस्तृत विश्लेषण करना उचित नहीं होता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभागीय कार्रवाई और आपराधिक जांच दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। विभागीय जांच के निष्कर्ष एक तथ्य हो सकते हैं, लेकिन वे किसी व्यक्ति की आपराधिक जवाबदेही को स्वतः समाप्त नहीं करते। रेलवे रिकॉर्ड और आरोपी के बीच के लेन-देन की गहराई से पूछताछ अभी बाकी है, इसी आधार पर अदालत ने अग्रिम जमानत आवेदन को निरस्त कर दिया।

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