चंद्रयान-3 की सफलता के बाद इसरो ने अपने पहले सूर्य मिशन PSLV-C57/Aditya-L1 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया हैं। लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से आज 2 सितंबर 2023 को 11:50 बजे की गई। यह लॉन्चिंग पीएसएलवी-एक्सएल रॉकेट से की गई है। इस रॉकेट की यह 25वीं उड़ान थी। यह लांचिंग सफलतापूर्वक की गई हैं।
आदित्य-एल 1 को सूर्य परिमंडल के दूरस्थ अवलोकन और पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर ‘एल1’ (सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंजियन बिंदु) पर सौर हवा का वास्तविक अवलोकन करने के लिए डिजाइन किया गया है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का ‘आदित्य-एल1’ सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला अंतरिक्ष यान होगा।
आदित्य-एल1′ के 125 दिनों में लगभग 15 लाख किलोमीटर की दूरी तय कर लैग्रेंजियन बिंदु ‘एल1’ के आसपास हेलो कक्षा में स्थापित होने की उम्मीद है, जिसे सूर्य के सबसे करीब माना जाता है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य सौर वातावरण में गतिशीलता, सूर्य के परिमंडल की गर्मी, सूर्य की सतह पर सौर भूकंप या कोरोनल मास इजेक्शन (सीएमई), सूर्य के धधकने संबंधी गतिविधियों और उनकी विशेषताओं तथा पृथ्वी के करीब अंतरिक्ष में मौसम संबंधी समस्याओं को समझना है।
आदित्य-L1 अपनी यात्रा की शुरुआत लोअर अर्थ ऑर्बिट (LEO) से करेगा। यानी PSLV-XL रॉकेट उसे तय LEO में छोड़ देगा। इसके बाद धरती के चारों तरफ 16 दिनों तक पांच ऑर्बिट मैन्यूवर करके सीधे धरती की गुरुत्वाकर्षण वाले क्षेत्र यानी स्फेयर ऑफ इंफ्लूएंस (SOI) से बाहर जाएगा। फिर शुरू होगी क्रूज फेज। यह थोड़ी लंबी चलेगी।
आदित्य-L1 को हैलो ऑर्बिट (Halo Orbit) में डाला जाएगा। जहां पर L1 प्वाइंट होता है। इस यात्रा में इसे 109 दिन लगेंगे। इसे कठिन इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसे दो बड़े ऑर्बिट में जाना है।
Aditya-L1 भारत की पहली अंतरिक्ष आधारित ऑब्जरवेटरी है। यह सूरज से इतनी दूर तैनात होगा कि उसे गर्मी तो लगे लेकिन खराब न हो, क्योंकि सूरज की सतह से थोड़ा ऊपर यानी फोटोस्फेयर का तापमान करीब 5500 डिग्री सेल्सियस रहता है। केंद्र का तापमान 1.50 करोड़ डिग्री सेल्सियस रहता है। ऐसे में किसी यान या स्पेसक्राफ्ट का वहां जाना संभव नहीं है।
आदित्य एल1 स्पेसक्रॉफ्ट यह जानकारी हासिल करेगा:
सौर तूफानों के आने की वजह, सौर लहरों और उनका धरती के वायुमंडल पर क्या असर होता है।
आदित्य सूरज के कोरोना से निकलने वाली गर्मी और गर्म हवाओं की स्टडी करेगा। सौर हवाओं के विभाजन और तापमान की स्टडी करेगा। सौर वायुमंडल को समझने का प्रयास करेगा।
आदित्य एल 1की सफलतापूर्वक लांचिंग के बाद सभी वैज्ञानिकों में हर्ष है और देशवासी भी खुशी मना रहे हैं और मिशन की कामयाबी की प्रार्थना कर रहें हैं।

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