ईरान। ईरान ने अपने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई दे दी है। 9 जुलाई को मशहद में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को एक हवाई हमले में उनकी मृत्यु हो गई थी। इस अंतिम विदाई कार्यक्रम में लाखों की भीड़ उमड़ी, लेकिन इस दौरान खामेनेई के बेटे मुज्तबा की गैर-मौजूदगी सबसे अधिक चर्चा का विषय रही। रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा कारणों से वे इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।
🗳️ राजनीतिक दिग्गज रहे नदारद: एकजुटता पर उठे सवाल
खामेनेई के जनाजे में ईरान की कई बड़ी राजनीतिक हस्तियों की अनुपस्थिति ने देश के राजनीतिक भविष्य और एकजुटता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी और हसन रूहानी जैसे सुधारवादी नेताओं की मौजूदगी न होना साफ दर्शाता है कि उनके और पूर्व सुप्रीम लीडर के बीच वैचारिक मतभेद कितने गहरे थे। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद भी अंतिम विदाई कार्यक्रम में नजर नहीं आए, हालांकि वे 6 जुलाई को निकले विदाई जुलूस में देखे गए थे।
🌍 विशेषज्ञों की राय: शासन की निरंतरता बनाम असुरक्षा
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरानी अधिकारियों ने जानबूझकर इस आयोजन को केवल मौजूदा नेतृत्व के करीबी लोगों तक ही सीमित रखा। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के अली वाएज के अनुसार, तेहरान दुनिया को यह संदेश देना चाहता था कि नेता को खोने के बाद भी उनका तंत्र सुचारू रूप से कार्य कर रहा है। हालांकि, देश के प्रमुख नेताओं की इस ‘बड़ी गैर-मौजूदगी’ ने यह भी साबित कर दिया है कि ईरानी नेतृत्व अभी भी अपने अस्तित्व को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहा है।
🤝 एकजुटता दिखाने का खोया अवसर
ईरान विशेषज्ञ अराश अजीजी का कहना है कि आयोजकों के पास सुधारवादी पूर्व राष्ट्रपतियों को आमंत्रित कर एक मजबूत राजनीतिक एकजुटता दिखाने का शानदार अवसर था। लेकिन इस अवसर को न चुनकर शासन ने यह दिखाया कि वे सबको साथ लेकर चलने के बजाय केवल शीर्ष अधिकारियों के नियंत्रण में बने रहने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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