April 18, 2026

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भारतीय संस्कृति और परंपरा में गंगा दशहरा सम्बन्धी पुराख्यान और जल संरक्षण पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न

उज्जैन: देश की प्रतिष्ठित संस्था राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के तत्वावधान में गायत्री जयंती, गंगा अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में भारतीय संस्कृति और परंपरा में गंगा दशहरा सम्बन्धी पुराख्यान और जल संरक्षण पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में संस्था के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा एवं प्रो राजश्री शर्मा की वैवाहिक वर्षगांठ पर शुभकामनाएं देने हेतु विभिन्न वक्ताओं ने अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में विषय के विविध पक्षों पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में हिंदी विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन , डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा ने अपने मंतव्य में कहा वैदिक परंपरा का गायत्री विषयक चिंतन हमें तीनों लोकों से जोड़ता है। भूलोक, अंतरिक्ष और देवलोक और उनके अधिष्ठाता परमात्मा के प्रति आराधन के भाव की व्यापक ब्रह्मांडीय अवधारणा अनुपम है। गंगा इस भूमि पर साक्षात् देव रूप है, जिसे पवित्रता के पर्याय के साथ सर्व कल्याणकारी माना गया है। वैदिक काल से अब तक असंख्य ऋषि और सर्जकों ने गंगा की महिमा का वर्णन किया है। पुरातन काल में नदियां गहरी तथा किनारे ऊँचे पहाड़ियों की तरह और वनों से आच्छादित थे। इन्हें पुनः वास्तविक रूप प्राप्त हो, यह जरूरी है।

ऑस्लो नॉर्वे के वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश चंद्र शुक्ल शरद आलोक ने अपनी कविता के माध्यम से डॉ. शर्मा को बधाई दी और कहा कि हमें जल का संरक्षण करना चाहिए।

हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य एवं महामंत्री, नागरी लिपि परिषद्, दिल्ली, डॉ. हरि सिंह पाल ने अध्यक्षीय भाषण में कहा, हमें प्राणदायिनी नदियों को प्रदूषित होने से बचाना है और इसके लिए नई पीढ़ी को प्रेरित करना हमारा कर्तव्य है।
बृजकिशोर शर्मा, पूर्व शिक्षा अधिकारी, अध्यक्ष, राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने कहा, समाज और राष्ट्र के सुख के लिए कार्य करने का उदाहरण है गंगा दशहरा।

डॉ.प्रभु चौधरी महासचिव, राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने कहा कि शिक्षकों का दायित्व है कि, देश को राष्ट्रहित में ले जाएं। हमारे जीवन में जन्म से मृत्यु तक गंगाजल का विशेष महत्व है।

पदमचंद गांधी ने कहा कि पिता सौ शिक्षकों से भी बड़ा होता है।
डॉ. जया सिंह रायपुर, हिंदी विभागाध्यक्ष ने कहा, पिता अपरिभाषित है, पिता के ऋण से हम नहीं उबर सकते । डॉ. दक्षा जोशी, अहमदाबाद, उपाध्यक्ष राष्ट्रीय शिक्षा संचेतना ने कहा ,गागर से लेकर सागर तक, प्यार से लेकर विश्वास तक, जीवन भर आपकी जोड़ी बनी रहे।

डॉ. अनसूया अग्रवाल छत्तीसगढ़ ,मुख्य संयोजक, राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने कहा, सनातन धर्म में इस दिवस पर गढ़मुक्तेश्वर, प्रयागराज आदि में स्नान का विशेष महत्व है। डॉ. अरुणा शुक्ला उप प्राचार्य नांदेड़ ने कहा हमें प्लास्टिक की बोतल का पानी नहीं पीना चाहिए बल्कि मटके का उपयोग करना चाहिए। बालासाहेब तोरस्कर ने कहा, हमारे जीवन में पिता भगवान से भी बढ़कर होते हैं।

डॉ. रश्मि चौबे गाजियाबाद, कार्यकारी अध्यक्ष महिला इकाई राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय प्रवक्ता, सुंदरलाल जोशी, उज्जैन की स्वरचित सरस्वती वंदना से हुआ, उन्होंने गाया, कोई कहता ब्रह्मा की पुत्री कोई, कहता ब्राह्मणी। स्वागत भाषण एवं प्रस्तावना डॉ .प्रभु चौधरी, महासचिव ,राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने एवं आभार व्यक्त करते हुए डॉ.शहनाज शेख महाराष्ट्र,राष्ट्रीय सचिव राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने कहा, मेरा बाप कम नहीं, मेरी मां से।

कार्यक्रम में डॉ. राजश्री शर्मा, उज्जैन, श्रीमती रमा शर्मा जापान, अरुणा शराफ, डॉ. धर्मेंद्र वर्मा, ऋतु शर्मा, दिव्या श्री प्रभा, डॉ. प्रभा दीपक शर्मा लखनऊ आदि अन्य अनेक विद्वान उपस्थित रहे।

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