इंदौर। देश में वोट चोरी को लेकर जारी सियासी चर्चाओं के बीच नर्मदा नदी में सैकड़ों वोटर आईडी कार्ड फेंकने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना के उजागर होने के बाद इंदौर जिला प्रशासन हरकत में आ गया है और संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से स्पष्टीकरण मांगते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
दरअसल, नर्मदा नदी के किनारे मंडलेश्वर में रविवार को 343 वोटर आईडी लावारिस हालत में पड़े मिले थे। पड़ताल में सामने आया है कि ये सभी कार्ड इंदौर की राऊ विधानसभा के मतदाताओं के हैं और पूरी तरह से ओरिजिनल (असली) हैं।
🧹 सफाई अभियान के दौरान सामने आई घटना, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
यह मामला तब सामने आया जब नर्मदा नदी के किनारे सफाई कार्य चल रहा था। सफाई कर्मियों ने जब भारी संख्या में लावारिस वोटर आईडी कार्ड देखे, तो उन्होंने तुरंत इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया।
वीडियो वायरल होते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। प्राथमिक जांच में यह पुष्टि हो गई है कि सभी वोटर आईडी इंदौर जिले से संबंधित हैं, लेकिन ये कार्ड मंडलेश्वर के नर्मदा तट पर कैसे पहुंचे, इसकी जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
📋 कलेक्टर शिवम वर्मा का बयान: 2016 के हैं वोटर कार्ड, BLO और सुपरवाइजर से मांगा स्पष्टीकरण
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि इस पूरे घटनाक्रम की प्रारंभिक रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को भेज दी गई है।
- 2016 के हैं कार्ड: प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया है कि ये सभी वोटर कार्ड वर्ष 2016 के हैं।
- अधिकारियों पर कार्रवाई: कलेक्टर ने बताया कि तत्कालीन इलेक्शन सुपरवाइजर और संबंधित BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है।
- गहन जांच: प्रशासन इस बात की तह तक जा रहा है कि शासकीय कस्टडी में रखे ये कार्ड बाहर कैसे आए और नदी किनारे किसने फेंके। इसके साथ ही उन सभी मतदाताओं से भी संपर्क किया जा रहा है, जिनके नाम पर ये कार्ड जारी हुए थे।
⚖️ कांग्रेस ने उठाए सवाल, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की
नर्मदा नदी किनारे इतनी बड़ी संख्या में ओरिजिनल वोटर कार्ड मिलने को बेहद गंभीर मानते हुए विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सरकार और प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला है। चुनाव आयोग, राज्य सरकार और इंदौर जिला प्रशासन को इसका त्वरित संज्ञान लेना चाहिए। जनता के सामने यह पूरी तरह स्पष्ट होना चाहिए कि सरकारी दस्तावेज इस तरह नदी किनारे कैसे पहुंचे और इसके पीछे किसकी लापरवाही या साजिश है।”

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