मुरैना। चंबल नदी में सक्रिय अवैध रेत माफियाओं की अब खैर नहीं है। तीन राज्यों की सरकारों और प्रशासनिक अमले ने मिलकर ऐसा मजबूत चक्रव्यूह तैयार किया है, जिससे अवैध रेत उत्खनन करने वालों की मुश्किलें पूरी तरह बढ़ सकती हैं।
मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के उच्च अधिकारियों ने मुरैना स्थित देवरी घड़ियाल केंद्र में एक महत्वपूर्ण रणनीति तैयार की है। सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की समीक्षा बैठक में चंबल नदी से अवैध रेत उत्खनन को पूरी तरह रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित सर्विलांस सिस्टम लगाने का बड़ा फैसला किया गया है।
सीईसी सदस्य सुनील लिमाये ने क्षेत्र में 16 नई वन चौकियां स्थापित करने, आधुनिक कैमरों और एआई आधारित टावरों से माफियाओं की गतिविधियों पर 24 घंटे पैनी नजर रखने के कड़े निर्देश दिए हैं। तीनों राज्यों की प्रशासनिक टीमें संयुक्त रूप से जांच करेंगी और अवैध खनन की सूचनाएं आपस में साझा करेंगी। इसके अलावा हर तीन महीने में अंतरराज्यीय समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी।
🛡️ चंबल के प्रतिबंधित क्षेत्र में बढ़ेगी त्रिस्तरीय निगरानी
मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सीमाओं का फायदा उठाकर अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और भंडारण करने वाले अपराधियों पर अब संयुक्त कार्रवाई होगी।
मंगलवार को देवरी घड़ियाल केंद्र में हुई सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में सीईसी सदस्य सुनील लिमाये और पी. कथिरवेल पहुंचे। इस दौरान मुरैना कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़, एसपी धर्मराज मीणा, राजस्थान के भिंड व धौलपुर के कलेक्टर-एसपी सहित तीनों राज्यों के वन, खनिज, पुलिस और परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी विभाग आपसी तालमेल से रेत माफियाओं के नेटवर्क को ध्वस्त करें।
🎥 18 संवेदनशील पॉइंट्स पर 36 CCTV कैमरों से चौबीसों घंटे निगरानी
समीक्षा बैठक के दौरान मुरैना डीएफओ हरिश्चंद्र बघेल ने वन विभाग की ओर से की गई तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चंबल घड़ियाल सेंचुरी के प्रतिबंधित एवं संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने के लिए 18 प्रमुख पॉइंट्स पर 36 हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जा चुके हैं, जिनसे लगातार गतिविधियों को ट्रैक किया जा रहा है।
🤖 रिठौरा घाट पर सवा करोड़ रुपये की लागत से AI सर्विलांस सिस्टम स्थापित
रेत माफियाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए चंबल नदी के रिठौरा घाट पर लगभग सवा करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक एआई (AI) सर्विलांस सिस्टम स्थापित किया गया है।
- 5 किमी रेंज: यह सिस्टम आसपास के करीब 5 किलोमीटर के दायरे की निगरानी करने में पूरी तरह सक्षम है।
- ऑटोमैटिक सायरन अलर्ट: प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी अनधिकृत वाहन या संदिग्ध गतिविधि के प्रवेश करते ही यह सिस्टम सायरन बजाकर तुरंत अधिकारियों को अलर्ट करेगा और लोकेशन शेयर करेगा।
🏗️ प्राकृतिक रेत का विकल्प: निर्माण कार्यों में एम-सैंड (M-Sand) को दिया जा रहा बढ़ावा
चंबल नदी के इकोसिस्टम और घड़ियालों के प्राकृतिक आवास को बचाने के लिए अब प्राकृतिक रेत के विकल्प के रूप में एम-सैंड (M-Sand) के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- मुरैना जिले में एम-सैंड की 39 खदानें स्वीकृत की गई हैं।
- सिंध नदी की रेत के कानूनी भंडारण के लिए 18 लाइसेंस जारी किए गए हैं।
- वर्तमान में ₹10 करोड़ से अधिक की लागत वाली सभी सरकारी निर्माण परियोजनाओं में एम-सैंड का उपयोग अनिवार्य किया जा रहा है, जिससे प्राकृतिक रेत की मांग घटेगी और चंबल के पर्यावरण का संरक्षण हो सकेगा।

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