ब्रसेल्स में आयोजित फिलिस्तीन डोनर ग्रुप (Palestine Donor Group-PDG) की दूसरी मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत ने फिलिस्तीन के प्रति अपने दीर्घकालिक समर्थन को दोहराया. भारत ने दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) और संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन की सदस्यता का समर्थन फिर से स्पष्ट किया. यूरोपीय आयोग और फिलिस्तीनी प्राधिकरण (Palestine Authority) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्रालय की सचिव (सीपीवी एवं ओआईए) श्रीप्रिया रंगनाथन ने किया. बैठक में यूरोपीय संघ के सदस्य देशों, फिलिस्तीन, अंतरराष्ट्रीय साझेदारों और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.
बैठक को संबोधित करते हुए श्रीप्रिया रंगनाथन ने कहा कि भारत लंबे समय से फिलिस्तीनी जनता का भरोसेमंद साझेदार रहा है. उन्होंने कहा कि भारत की विकासात्मक सहायता मांग-आधारित (Demand-driven) है और मुख्य रूप से स्वास्थ्य, शिक्षा, क्षमता निर्माण तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण पर केंद्रित है.
किन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है भारत?
श्रीप्रिया रंगनाथन ने बताया कि भारत फिलिस्तीन में स्वास्थ्य सेवाओं, महिला सशक्तिकरण और संस्थागत क्षमता निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है. इसके साथ ही भारत ने पुनर्वास, स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण से जुड़ी कई नई परियोजनाओं की भी घोषणा की.
ब्रसेल्स प्रवास के दौरान श्रीप्रिया रंगनाथन ने संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) की सलाहकार आयोग (Advisory Commission) के आगामी अध्यक्ष द्वारा आयोजित बैठक में भी भाग लिया. इस दौरान उन्होंने फिलिस्तीन में एजेंसी के मानवीय कार्यों के लिए भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत फिलिस्तीनी जनता की मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक प्रतिबद्ध और विश्वसनीय साझेदार बना रहेगा तथा भविष्य में भी ठोस सहयोग जारी रखेगा.
जकार्ता में किया था फिलिस्तीन का जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई को कहा था कि भारत और इंडोनेशिया ग्लोबल मुद्दों पर सहयोग बढ़ाएंगे. उन्होंने इज़राइल-फिलिस्तीन विवाद को खत्म करने के लिए ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ (दो-देश समाधान) के महत्व को भी दोहराया था.पीएम मोदी ने जकार्ता में प्रेस के सामने यह बात कही, जहां उन्होंने और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो ने कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए. इन समझौतों में भारत द्वारा इंडोनेशिया को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल सिस्टम और अस्त्र Mk-1 बियॉन्ड-विज़ुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलें देने से जुड़े समझौते भी शामिल हैं.

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