सागर। अब तक किसी भी रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम करने या सरकारी अनुदान हासिल करने के लिए विद्यार्थियों को पीजी, नेट या पीएचडी का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत ग्रेजुएशन के छात्र भी रिसर्च कर सकेंगे। मध्य प्रदेश के डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय (सागर यूनिवर्सिटी) के शिक्षाशास्त्र विभाग के आईटीईपी (ITEP), बी.कॉम बी.एड के 7वें सेमेस्टर के छात्रों ने यह इतिहास रचा है। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली द्वारा प्रतिष्ठित ‘युवा शोध प्रतिभा योजना’ के तहत सागर यूनिवर्सिटी की दो रिसर्च टीमों को बाकायदा प्रोजेक्ट फंड स्वीकृत किया गया है।
🔬 लाखों का प्रोजेक्ट फंड और 6 महीने का स्टायपेंड: जानिए किस विषय पर शोध करेंगे छात्र
विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग के लिए कुल दो प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए हैं। पहला प्रोजेक्ट भूमिका चौरसिया के नेतृत्व में (आनंद अहिरवार और प्रियंश चढ़ार) पेश किया गया था, जिसके लिए 2.50 लाख रुपये का फंड मिला है। यह प्रोजेक्ट माध्यमिक स्तर के छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक जुड़ाव पर भारतीय दर्शन आधारित मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप पर काम करेगा। वहीं, अक्षय दुबे के नेतृत्व में (तरुण रिछारिया और उन्नति राज) दूसरे प्रोजेक्ट को 2.40 लाख रुपये का फंड मिला है, जो पूर्वजों की पारंपरिक विधियों द्वारा पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित है। प्रोजेक्ट गाइड डॉ. प्रवीण कुमार टीडी और विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार जैन ने इसे यूनिवर्सिटी के इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण बताया, जिससे स्नातक स्तर पर ही छात्रों को रिसर्च का वास्तविक अनुभव मिलेगा।

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