September 24, 2026

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History of Janbazar Rajbari Kolkata: रानी रासमणि के ऐतिहासिक घर से जुड़े अनसुने किस्से, जानिए क्यों मनाई जाती हैं तीन दुर्गा पूजा

कोलकाता अपनी शानदार इमारतों और बंगाल के कुछ बड़े नामों से जुड़ी कहानियों के लिए जाना जाता है. इन्हीं नामों में से एक हैं रानी रासमणि, जिन्हें मशहूर दक्षिणेश्वर काली मंदिर बनवाने के लिए याद किया जाता है. उनका पारिवारिक घर, जानबाजार राजबाड़ी भी एक दिलचस्प इतिहास समेटे हुए है. यह राजबाड़ी हर साल तीन अलग दुर्गा पूजाएं आयोजित करती है. चलिए जानते हैं कि आखिर एक ही जगह पर तीन दुर्गा पूजा क्यों होती हैं और इसका इतिहास क्या है?

इतिहासकार बताते हैं कि, मध्य कोलकाता में यह भव्य घर 1805 में धनी व्यवसायी बाबू प्रीताराम दास ने बनवाना शुरू किया था. उनके बेटे बाबू राज चंद्र दास ने 1813 में इसे पूरा करवाया. इस विशाल घर में करीब 300 कमरे, छह बड़े आंगन, एक ठाकुर दालान, एक नाट मंदिर, एक शस्त्रागार और एक तालाब भी था. राज चंद्र की अचानक मौत के बाद, रानी रासमणि ने इस पूरी संपत्ति की जिम्मेदारी संभाली.

तीन दुर्गा पूजा की वजह

रानी रासमणि के समय के बाद, इस विशाल संपत्ति को उनकी बेटियों के परिवारों में बांट दिया गया. इसी बंटवारे की वजह से आज भी पुरानी राजबाड़ी के अलग अलग हिस्सों में तीन अलग दुर्गा पूजाएं मनाई जाती हैं. यह एक अनोखी परंपरा है जो पीढ़ियों से चली आ रही है.

रानी रासमणि का योगदान

बुओयंट लाइफस्टाइल के अनुसार, रानी रासमणि ने कम उम्र में अपने पति को खोने के बाद अपने परिवार की जमींदारी और वित्तीय मामलों को संभाला था. उस समय महिलाओं की समाज में पुरुषों जैसी स्थिति नहीं थी, लेकिन उन्होंने परिवार के मामलों का नेतृत्व किया. उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ भी आवाज उठाई और हुगली नदी में मछली पकड़ने पर लगे टैक्स को हटवाने के लिए खूब काम किया. रासमणि ने समाज सुधारक राजा राम मोहन रॉय के साथ मिलकर बाल विवाह और सती प्रथा के खिलाफ भी समर्थन किया. उनका काम सिर्फ सामाजिक मुद्दों तक सीमित नहीं था. उन्होंने गरीब लोगों की मदद के लिए भी कई दान कार्य किए. उन्होंने कोलकाता में इंपीरियल लाइब्रेरी और हिंदू कॉलेज जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं और पुस्तकालयों के लिए भी दान दिया.

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