उज्जैन: धार्मिक नगरी उज्जैन में नईखेड़ी से चिंतामणि तक 8.60 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित रेललाइन के लिए चिह्नित जमीन अधिग्रहण के विरोध में किसानों ने उग्र मोर्चा खोल दिया है। बिना किसी पूर्व आधिकारिक सूचना के सर्वे और परिसंपत्तियों की जांच करने पहुंची प्रशासन और रेलवे की संयुक्त टीम को किसानों के कड़े विरोध के बाद बिना काम किए वापस लौटना पड़ा। परियोजना से प्रभावित 5 गांवों के किसानों का कहना है कि उनकी जमीनों का वर्तमान बाजार मूल्य करोड़ों रुपये में है, जबकि प्रशासन द्वारा मुआवजे की गणना सरकारी गाइडलाइन के बेहद कम दरों से की जा रही है।
🚉 सिंहस्थ 2028 के लिए तैयार हो रहा है बायपास रूट; 5 गांवों के 85 किसान होंगे सीधे प्रभावित
परियोजना का उद्देश्य और विवाद का दायरा:
- ट्रेनों का दबाव घटाना: सिंहस्थ 2028 के विशाल आयोजन के दौरान उज्जैन मुख्य रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के भारी दबाव को नियंत्रित करने के लिए नईखेड़ी-चिंतामण रेल बायपास परियोजना तैयार की जा रही है।
- 85 सर्वे नंबर प्रभावित: इस प्रस्तावित 8.60 किलोमीटर लंबे रेललाइन एलाइनमेंट के लिए दाऊद खेड़ी, चिंतामण, मोहनपुरा, मंगरोला और उज्जैन कस्बा क्षेत्र की जमीनें चिह्नित की गई हैं। इन 5 गांवों के कुल 85 किसान सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं, जिन्होंने शुक्रवार को राजस्व एवं रेलवे टीम का घेराव कर सर्वे रोक दिया।
📐 4 से 5 बार बदला जा चुका है एलाइनमेंट; बार-बार रूट बदलने से नाराज किसानों ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
एलाइनमेंट और कानूनी विवाद:
- किसानों का आरोप: किसान नेताओं का कहना है कि परियोजना का रूट 4 से 5 बार बदला जा चुका है। शुरुआत में ऐसे विकल्पों पर चर्चा हुई थी जिससे कम उपजाऊ जमीन प्रभावित होती और निर्माण लागत भी काफी घट जाती। इसके बावजूद अब खेतों के बीचों-बीच से रेल ट्रैक निकाला जा रहा है।
- हाईकोर्ट में मामला: किसानों ने एलाइनमेंट में अनियमितताओं को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट में रेलवे ने अपना पक्ष रखने के लिए 4 हफ्ते का समय मांगा है, लेकिन दूसरी तरफ धरातल पर बिना सूचना दिए जबरन सर्वे प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
💰 बाजार दर ₹4,000 प्रति वर्ग फीट, जबकि मुआवजा केवल ₹60 लाख बीघा; भारी अंतर से असंतोष
जमीन के दाम और मुआवजे का गणित:
- विकसित क्षेत्र की जमीन: प्रस्तावित रेल लाइन के आसपास वर्तमान में 7 रिहायशी कॉलोनियां और बड़े व्यावसायिक होटल संचालित हो रहे हैं। यहाँ आवासीय व व्यावसायिक भूखंडों की कीमत ₹4,000 प्रति वर्ग फीट तक पहुँच चुकी है।
- दाम और मुआवजे का अंतर: किसानों के अनुसार, जमीन का असली बाजार मूल्य ₹3 से ₹4 करोड़ प्रति बीघा है, जबकि सरकारी गाइडलाइन मात्र ₹15 से ₹26 लाख प्रति बीघा दर्ज है। नियमानुसार चार गुना मुआवजा जोड़ने पर भी यह राशि लगभग ₹60 लाख प्रति बीघा ही बन रही है, जिससे किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
🗣️ किसानों की मांग: पहले संयुक्त बैठक बुलाकर लिखित में दें आधिकारिक प्रस्ताव; प्रशासन ने दीवाली बाद का दिया समय
किसान पक्ष और प्रशासनिक बयान:
- किसान जीत सिंह फौजी का बयान: किसान नेता जीत सिंह फौजी ने कहा, “अधिकारियों को सभी प्रभावित किसानों की संयुक्त बैठक बुलाकर मुआवजे की दर, अधिग्रहीत सीमा और पूरी प्रक्रिया लिखित रूप में बतानी चाहिए। बिना पूर्व सूचना खेतों में घुसकर सर्वे करने से किसान सहयोग नहीं करेंगे।”
- नायब तहसीलदार का पक्ष: मौके पर पहुंची नायब तहसीलदार दीप्ति मांझी ने बताया कि राजस्व टीम खेतों में मौजूद ट्यूबवेल, पेड़ और निर्मित परिसंपत्तियों का मूल्यांकन करने गई थी। किसानों द्वारा औपचारिक जानकारी की मांग किए जाने पर उन्हें दीवाली पर्व के बाद कलेक्ट्रेट/तहसील कार्यालय में बुलाकर विस्तृत जानकारी देने का भरोसा दिया गया है।

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