उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में दो दिन पहले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज और मंदिर के स्टाफ के बीच हुआ विवाद अब और अधिक तूल पकड़ गया है। मंदिर स्टाफ पर गंभीर अभद्रता का आरोप लगाते हुए महंत रवींद्र पुरी ने प्रदेश और केंद्र सरकार तक अपनी शिकायत भेज दी है। उन्होंने मंदिर प्रशासक आईएएस प्रथम कौशिक को तुरंत उनके पद से हटाने की कड़ी मांग की है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद से धार्मिक गलियारों और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है।
✉️ मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को लिखा पत्र; प्रोटोकॉल और बिना चेकिंग के प्रवेश को लेकर हुआ था विवाद
रवींद्र पुरी महाराज के पत्र के मुख्य बिंदु:
- शिकायत और पत्र: अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सिंहस्थ मेला अधिकारी सह उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह को आधिकारिक पत्र लिखकर मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।
- पत्र में बयान: पत्र में उन्होंने लिखा है, “मैं जब दर्शन करने मंदिर गया तो वहाँ कर्मचारियों ने मुझसे और मेरे अनुयायियों के साथ अभद्रता की। प्रोटोकॉल के तहत मेरे साथ जिस सहायक प्रशासक की ड्यूटी थी, वे समय पर नहीं पहुँचे। मंदिर के कर्मचारियों ने कहा कि प्रशासक के सख्त आदेश हैं कि साधु-संतों को बिना चेकिंग के अंदर नहीं जाने दिया जाए।”
🚨 संतों के अपमान पर भड़के अखाड़ा परिषद अध्यक्ष; आरोपी कर्मचारी बदला गया, लेकिन नाराजगी बरकरार
कार्रवाई और महंत का रुख:
- सनातन परंपरा पर असर: रवींद्र पुरी ने आरोप लगाया कि महाकाल मंदिर में साधु-संतों के साथ इस तरह का अपमानजनक व्यवहार किया जाता है, जो सनातन परंपरा और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसलिए प्रशासक प्रथम कौशिक को हटाकर किसी संवेदनशील अधिकारी की नियुक्ति की जानी चाहिए।
- कर्मचारी पर एक्शन: अपनी नाराजगी व्यक्त करने के बाद महंत रवींद्र पुरी महाराज शुक्रवार देर शाम दिल्ली के लिए रवाना हो गए। वहीं, जिस कर्मचारी (जगदीश गौड़) ने उनके साथ अभद्रता की थी, उसे ड्यूटी से हटाकर मंदिर समिति ने राजू मालवीय को तैनात कर दिया है, लेकिन अखाड़ा परिषद अध्यक्ष इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं।
🌐 ‘कुछ लोग मंदिर की छवि कर रहे धूमिल’; सिंहस्थ 2028 को लेकर उठाई बड़ी चिंता
मंदिर व्यवस्था और भविष्य की चिंता:
- मंदिर की छवि: रवींद्र पुरी का कहना है कि उन्होंने संबंधित व्यक्ति का नाम मंदिर प्रशासन को बता दिया है, लेकिन ऐसे व्यक्तियों को मंदिर में रखना बिल्कुल उचित नहीं है। बाबा महाकाल केवल उज्जैन के नहीं बल्कि पूरी दुनिया के हैं।
- सिंहस्थ 2028: उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले सिंहस्थ 2028 में देश-दुनिया से करोड़ों लोग आएंगे, और इस तरह के मामलों से मंदिर की छवि धूमिल होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने मंदिर की दर्शन व्यवस्था को पूरी तरह से ‘धंधा’ बना लिया है, जिसे तुरंत सुधारे जाने की जरूरत है।

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