सितंबर महीने की शुरुआत के साथ ही बाजारों में सीताफल की आवक शुरू हो गई है। यह सिर्फ एक स्वादिष्ट फल ही नहीं, बल्कि प्रकृति का एक अनमोल वरदान माना गया है, जो हमारी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इसके अलावा, आयुर्वेद में इसके फल के साथ-साथ इसकी जड़ों और पत्तियों का उपयोग भी विभिन्न औषधियों के रूप में किया जाता है। जानकारों के अनुसार, सीताफल के पत्तों का लेप बनाकर त्वचा के घावों, फोड़े-फुंसियों और सूजन वाली जगह पर लगाने से काफी राहत मिलती है, और यह शरीर को कई प्रकार से पोषण प्रदान करता है।
⏳ सितंबर से नवंबर तक रहता है पीक सीजन, दोपहर के समय खाना माना जाता है सबसे फायदेमंद
स्थानीय किसान लाल बाबू सिंह सेंगर के अनुसार, सीताफल के लिए सितंबर से नवंबर तक का समय इसका मुख्य ‘पीक सीजन’ माना जाता है, क्योंकि इस दौरान सबसे बेहतरीन क्वालिटी के फल मिलते हैं। हालांकि, इसका पूरा सीजन अगस्त से लेकर दिसंबर तक रहता है। इसके पेड़ों पर गर्मी के दिनों यानी मई-जून में फूल आने शुरू हो जाते हैं और मानसून की विदाई के साथ फल पकने लगते हैं। आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. अंकित नामदेव बताते हैं कि सीताफल मधुर रस, मधुर विपाक और शीत वीर्य होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा (एनर्जी) प्रदान करता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन्स और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। इसकी तासीर ठंडी होने के कारण इसे दिन में या खासतौर पर दोपहर के समय खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।
🌿 ब्लीडिंग डिसऑर्डर में मददगार और बालों की समस्याओं को दूर करती हैं इसकी पत्तियां
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से सीताफल ब्लीडिंग डिसऑर्डर (रक्तस्राव संबंधी समस्याओं) में बहुत असरदार माना जाता है, विशेषकर वहाँ जहाँ रक्त में पित्त के कारण ब्लीडिंग होती है। इसके अलावा, इसकी जड़ का चूर्ण एक्जिमा जैसी त्वचा संबंधी बीमारियों में भी काम आता है। इसकी पत्तियों को पानी में उबालकर उस पानी से सिर धोने पर बालों से जुड़ी कई समस्याएं दूर हो जाती हैं। दाद, खाज और खुजली जैसी परेशानियों में भी इसके पत्ते काफी उपयोगी साबित होते हैं। पौष्टिक तत्वों से भरपूर होने के कारण यह फल ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में बेहद लोकप्रिय है।

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