पीढ़ियों से सूखे बुंदेलखंड को हरा-भरा और समृद्ध बनाने के लिए केंद्र सरकार की बहुचर्चित ‘केन-बेतवा लिंक परियोजना’ अब धरातल पर एक बड़े बदलाव की गवाही दे रही है। हालांकि इस परियोजना को लेकर एक वर्ग लगातार राजनीतिक विरोध जताता रहा है, लेकिन दूसरी ओर यह योजना गरीब परिवारों, आदिवासियों और ग्रामीण विस्थापितों के जीवन में एक नया सवेरा लेकर आई है। इसका सबसे जीवंत उदाहरण पल्कोंहा गांव के गब्बर आदिवासी और बमीठा के भरत दुबे जैसे लोग हैं, जो कभी कच्चे मिट्टी के घरों में जीवन गुजारने को मजबूर थे, लेकिन अब भारी-भरकम मुआवजा राशि मिलने के बाद उनके जीवन स्तर में अभूतपूर्व सुधार आया है।
💰 छतरपुर के 14 प्रभावित गांवों में अब तक 817 करोड़ से अधिक की मुआवजा राशि वितरित
इस महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना की चर्चा पूरे देश में है और इसके तहत छतरपुर जिले के 14 प्रभावित गांवों में अब तक कुल 817.01 करोड़ रुपये की बंपर मुआवजा राशि बांटी जा चुकी है। कलेक्टर मृणाल मीणा के निर्देशन में विशेष शिविरों के माध्यम से हाल ही में 21.15 करोड़ रुपये की राशि सीधे पात्र विस्थापितों के बैंक खातों में पहुंचाई गई है। कलेक्टर मृणाल मीणा का कहना है कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य जहाँ एक तरफ 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई और 44 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना है, वहीं दूसरी तरफ इससे मिलने वाले मुआवजे ने समाज के पिछड़े तबके को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया है।
🏡 पीढ़ियों के कच्चे मकानों के दिन फिरे, गब्बर और भरत दुबे ने नए घरों के साथ शुरू किया बिजनेस
परियोजना से प्रभावित पल्कोंहा निवासी गब्बर आदिवासी ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि उनकी कई पीढ़ियां मिट्टी के कच्चे घरों में ही गुजर गई थीं और पास में कृषि भूमि भी नहीं थी, लेकिन केन-बेतवा परियोजना के मुआवजे से उनकी किस्मत पलट गई है और अब उन्होंने पीरा गांव में प्लॉट खरीदकर अपने पक्के घर का सपना पूरा कर लिया है। इसी तरह भरत दुबे ने अपने परिवार को मिले कुल 54.95 लाख रुपये के पैकेज (भूमि, मकान और पुनर्वास राशि) का सदुपयोग करते हुए बमीठा में आलीशान नया मकान बनवाया है और साथ ही कपड़े का एक नया शोरूम खोलकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह मजबूत कर लिया है।

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