मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर स्थित सरकारी अस्पतालों में सस्ते इलाज की आस लेकर पहुंचने वाले गरीब मरीजों को पैथोलॉजी जांचों के नाम पर भारी आर्थिक चपत लग रही है। अस्पतालों में पहुंचे मरीजों को डॉक्टर बीमारी की सटीक पहचान के लिए जरूरी खून और अन्य जांचें लिखकर दे रहे हैं, लेकिन अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में वे आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध ही नहीं हैं। इसके चलते इलाज कराने आए जरूरतमंद मरीजों को मजबूरी में निजी लैब की शरण लेनी पड़ रही है।
🧪 मुरार जिला अस्पताल और हजीरा अस्पताल की खुली पोल: निजी लैब में 1000 से 1500 रुपये तक फूंकने को मजबूर मरीज
ग्वालियर के प्रमुख मुरार जिला अस्पताल और हजीरा सिविल अस्पताल की जमीनी स्थिति यह बताती है कि प्रदेश सरकार द्वारा निशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे मरीजों के लिए कितने अधूरे साबित हो रहे हैं। अस्पतालों की पैथोलॉजी में सुविधाएं न होने के कारण गरीब मरीजों को निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है, जहां उन्हें मामूली जांचों के लिए भी 1000 से 1500 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। इस व्यवस्था के चलते मध्य प्रदेश के दूर-दराज से आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर इलाज का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

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