मध्य प्रदेश के गुना जिले की आरोन तहसील के अंतर्गत आने वाले घटावदा गांव के शासकीय स्कूल में कक्षा 5 की छात्राओं के साथ हुई बेहद शर्मनाक और अमानवीय घटना के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। पानी की बोतल में यूरिन (पेशाब) भरकर पिलाने के इस गंभीर मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने तत्काल प्रभाव से दो अतिथि शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया है। इस अमानवीय घटना के सामने आने के बाद से ही पूरे गांव और क्षेत्र में भारी तनाव और आक्रोश का माहौल बना हुआ था। आक्रोशित परिजन स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लगाकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने तुरंत एक जांच दल गठित किया था और दो दिनों के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे, जिसके आधार पर यह बड़ी कार्रवाई की गई है।
📋 जांच में दोषी पाए गए अतिथि शिक्षक, क्लास से गायब रहने पर गिरी गाज
जांच प्रतिवेदन के अनुसार, मासूम छात्राओं को यूरिन पिलाने की यह घटना पूरी तरह सत्य पाई गई है। पीड़ित छात्राओं द्वारा दिए गए बंसल और बयानों के अनुसार, घटना का समय सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच का पाया गया। निर्धारित समयावधि के दौरान कक्षा 7वीं में अध्यापन कार्य के लिए दो अतिथि शिक्षकों के पीरियड तय किए गए थे, लेकिन जांच में यह सामने आया कि ये दोनों अतिथि शिक्षक—रामकिशोर शर्मा और रणवीर सिंह धाकड़—अपने निर्धारित समय पर कक्षा में उपस्थित नहीं थे। इसी गंभीर लापरवाही और उदासीनता के चलते यह पूरी घटना घटित हुई। प्रथम दृष्टया इस पूरे अमानवीय घटनाक्रम में इन दोनों अतिथि शिक्षकों को पूरी तरह दोषी पाया गया, जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने इनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के निर्देश जारी कर दिए।
😡 क्या था पूरा मामला और क्यों मचा था राजनीतिक घमासान?
यह पूरा मामला इतना संवेदनशील और गंभीर था कि इस पर गुना की स्थानीय राजनीति भी गरमा गई थी और दो पूर्व आमने-सामने आ गए थे। आरोन विकास खंड के इस शासकीय स्कूल में कक्षा 5 की दो मासूम छात्राओं को कुछ अन्य छात्रों द्वारा पानी की बोतल में यूरिन भरकर पिला दिया गया था। जब पीड़ित छात्राएं रोते हुए इस बात की शिकायत लेकर स्कूल के प्राचार्य के पास पहुंचीं, तो उन्होंने बेहद गैर-जिम्मेदाराना और असंवेदनशील जवाब देते हुए कहा कि “टेस्ट बेकार है तो 10 रुपये की टॉफी लाकर खा लीजिए।” प्राचार्य के इस आपत्तिजनक बयान ने आग में घी का काम किया और पूरे इलाके में हंगामा मच गया। जब बच्चियों ने रोते-बिलखते हुए अपने परिजनों को पूरी आपबीती सुनाई, तो परिजन गुस्से से आगबबूला होकर स्कूल पहुंच गए और गेट बंद कर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस पूरी घटना के बाद जिला शिक्षा अधिकारी समर सिंह राठौड़ ने हर पहलू की बारीकी से जांच कराई और अंततः दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की।

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