April 22, 2026

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विक्रम विश्वविद्यालय में हुआ भव्य दीक्षारम्भ समारोह का आयोजन, उच्च शिक्षा मंत्री परमार हुए शामिल

उज्जैन: विक्रम विश्वविद्यालय की इंजीनियरिंग अध्ययनशाला सभागृह में दीक्षारम्भ समारोह का आयोजन किया गया। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार विक्रम विश्वविद्यालय के दीक्षारम्भ समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो अखिलेश कुमार पांडेय ने की। विशिष्ट अतिथि विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा थे।

मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का भारतीय ज्ञान परम्परा से गहरा नाता रहा है। केन्द्र शासन द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति वर्ष 2020 में प्रारम्भ की गई। शिक्षकों को उनके विद्यार्थियों पर गर्व हो, ऐसी शिक्षा हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से उन्हें प्रदान करें तथा एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण करने में अपना सहयोग प्रदान करें। दीक्षारंभ का दिवस स्वयं को गढ़ने का दिन है। भारतीय ज्ञान परंपरा में दीक्षारंभ और दीक्षांत का विशेष महत्व है। दीक्षारंभ एवं दीक्षांत किसी भी विद्यार्थी के जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पल होते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इस दिशा में हम सभी को स्वाभिमान से आगे बढ़ने का अवसर दे रही है। आज से 300 साल पहले भारत में सात लाख से अधिक गुरुकुल और शैक्षणिक संस्थान थे। इनमें तक्षशिला और नालन्दा जैसे संस्थानों ने पूरे विश्व में ज्ञान और उत्तम शिक्षा का परचम लहराया। समूचे विश्व के विद्यार्थी यहां विद्याध्ययन के लिये आते थे। लेकिन समय-समय पर विदेशी आक्रमणकर्ताओं ने हमारे संस्थानों को तथा शिक्षा पद्धति को नुकसान पहुंचाया। मंत्री परमार ने दीक्षारम्भ समारोह में शामिल सभी विद्यार्थियों को अपनी ओर से उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी। अंग्रेजों ने योजनाबद्ध ढंग से भारतीय समाज और संस्कृति के आत्म स्वाभिमान को नष्ट करने का प्रयास किया। भारत में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े-बड़े संस्थान थे। आक्रांताओं के लगातार हमलों के कारण पारंपरिक गुरुकुल प्रणाली के समक्ष अनेक चुनौतियां उपस्थित हुईं। फिर भी भारत ने अपने स्वत्व को नहीं खोया। भारतीय ज्ञान परम्परा के तत्वों को नए सिरे से अंगीकार करने की आवश्यकता है।

विशिष्ट अतिथि विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा द्वारा सभी को पर्यावरण संरक्षण के लिये पौधारोपण करने तथा हर घर तिरंगा अभियान के अन्तर्गत अपने-अपने घरों पर तिरंगा लगाने का संकल्प दिलवाया गया।

कुलगुरु प्रो अखिलेश कुमार पांडेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत अधुनातन विज्ञान के विकास में निरंतर महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। भारत के महान ऋषि वैज्ञानिकों के ग्रन्थों को आक्रांताओं के द्वारा जलाया गया। फिर भी भारतीय मनीषा ने अपनी ज्ञान प्रणाली के महत्वपूर्ण सूत्रों को जीवित रखा। भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति व्यापक रुचि जागृत करने के साथ उससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास आवश्यक है।

दीक्षारम्भ समारोह की पीठिका एवं स्वागत भाषण कुलानुशासक प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा ने प्रस्तुत की। प्रो शर्मा ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में नव प्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में विश्वविद्यालय द्वारा लगभग 290 पाठ्यक्रमों का संचालन किया जा रहा हैं। उन्होंने विक्रम विश्वविद्यालय द्वारा किये गये नवाचार के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि विश्वविद्यालय परिसर में हर वर्ष विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि हो रही हैं।

अतिथियों द्वारा विक्रम विश्वविद्यालय के रिसर्च जनरल विक्रम के कालिदास विशेषांक का विमोचन किया गया। विमोचन पत्रिका के संपादक एवं कालिदास समिति के सचिव प्रो शैलेंद्र कुमार शर्मा ने करवाया। विश्वविद्यालय के नव प्रकाशित ब्रोशर एवं पोस्टर का लोकार्पण अतिथियों द्वारा किया गया।

मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विश्वविद्यालय के एस ओ ई टी परिसर एवं शालिग्राम तोमर छात्रावास परिसर में एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत पौधरोपण किया।

इस अवसर पर श्री सत्य साईं समिति संस्था को उनके द्वारा किए जा रहे पौधारोपण अभियान के लिए मुख्य अतिथि द्वारा प्रशस्ति पत्र अर्पित कर सम्मानित किया गया।

दीक्षारंभ समारोह पर केंद्रित रंगोली चित्रण ललित कला, संगीत एवं नाट्य अध्ययनशाला के विद्यार्थियों द्वारा की गई। निर्देशक विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जगदीश चंद्र शर्मा, कलागुरु लक्ष्मीनारायण सिंहरोड़िया तथा विद्यार्थी कलाकारों पंकज सेहरा एवं आदित्य चौहान को प्रशस्ति पत्र अर्पित कर उन्हें सम्मानित किया गया।

विक्रम विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ अनिल कुमार शर्मा, कार्यपरिषद सदस्य डॉ मंजूषा मिमरोट, कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा, संकायाध्यक्ष विद्यार्थी कल्याण विभाग प्रो.एसके मिश्रा, निदेशक प्रो.संदीप तिवारी आदि उपस्थित थे। स्वस्तिवाचन डॉक्टर सर्वेश्वर शर्मा, डॉक्टर गोपाल कृष्ण शुक्ल एवं डॉ महेंद्र पांडे ने किया। प्रारंभ में अतिथियों द्वारा सरस्वती पूजन के पश्चात कुलगान गाया गया। अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया गया साथ ही अतिथियों को विश्वविद्यालय की ओर से स्मृति चिन्ह एवं शाल, श्रीफल भेंट किये गये। इस महत्वपूर्ण आयोजन में अनेक संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, अधिकारी, कर्मचारीगण, शोधार्थियों, विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

संचालन डॉ अमृता शुक्ला, संयोजन डॉ नेहा सिंह, इंजी मोहित प्रजापति आदि ने किया। आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉक्टर अनिल कुमार शर्मा ने किया।

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