October 30, 2026

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India Gold Buying Festival Demand: भारत में त्योहारी सीजन के बीच सोने की मांग में तेजी, जानिए आईबीजेए (IBJA) के ताजा आंकड़े

अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किए जाने के निर्णय से भारत में सोने के आभूषण और सिक्के खरीदने वालों को कुछ राहत मिल सकती है। जानकारों के अनुसार, इस फैसले से आने वाले हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में बहुत बड़े उतार-चढ़ाव (Volatility) की गुंजाइश फिलहाल कम हो गई है।

हालांकि, सर्राफा बाजार में टिकाऊ सुधार इस बात पर निर्भर करेगा कि आगामी दिसंबर माह में अमेरिकी फेड की तरफ से ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें किस हद तक कमजोर पड़ती हैं। दूसरी तरफ, भारत में चालू फेस्टिव सीजन के कारण बढ़ती मांग और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों (Global Tensions) के चलते बाजार पर दबाव भी बना हुआ है।

📊 एक्सपर्ट अनुज गुप्ता की राय: MCX पर ₹1.40 लाख के स्तर पर खरीदारी का बन सकता है बेहतरीन मौका

कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के अनुसार, अमेरिकी फेड की दरों में यथास्थिति बने रहने से सोने के भाव में स्थिरता देखने को मिल सकती है, जिससे आम खरीदारों को तात्कालिक राहत मिलेगी। लेकिन, कीमतों में ठहराव आने और उसमें लगातार तेजी की शुरुआत होने के बीच बड़ा अंतर है।

  • अंतरराष्ट्रीय व MCX के स्तर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 4,120 डॉलर प्रति औंस और घरेलू स्तर पर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 10 ग्राम सोने का भाव 1.46 लाख रुपये के स्तर से नीचे रहने के कारण दबाव देखा जा रहा है।
  • खरीदारी का सही समय: यदि भारतीय बाजार में सोने की दरें गिरकर 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास आती हैं, तो यह खरीदारों के लिए लॉन्ग-टर्म निवेश या आभूषणों की खरीदारी का एक आदर्श अवसर हो सकता है। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये (Rupee vs Dollar Rate) की चाल भी सर्राफा बाजार के रुख को तय करेगी।
🗓️ दिसंबर में अमेरिकी फेड के रुख से तय होगी सोने की अगली चाल

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, फेड रिजर्व के ताजा फैसले से सोने की कीमतों की मूल दिशा में कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ है, क्योंकि निवेशकों को दरें स्थिर रहने का पूर्वाभास पहले से ही था।

  • दिसंबर में 78% दरें बढ़ने की संभावना: अब दिसंबर में होने वाली बैठक में अमेरिकी फेड द्वारा फिर से ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना 78% जताई जा रही है, जो पीली धातु पर लगातार दबाव बनाए रख सकती है।
  • ब्याज दरों का गणित: दरअसल, जब भी ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशकों के लिए नियमित ब्याज देने वाले फिक्स्ड एसेट्स ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं। वहीं सोने पर कोई तय नियमित ब्याज या रिटर्न नहीं मिलता, इसलिए दरें बढ़ने की आशंका से सोने की मांग और कीमतों पर नकारात्मक असर पड़ता है।
🛍️ भारत में त्योहारी खरीदारी से सर्राफा बाजार को मिल रहा है मजबूत सहारा

अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर अनिश्चितता के बाद भी भारत में पिछले कुछ दिनों के दौरान सोने की खरीदारी में जबरदस्त उछाल देखा गया है।

  • IBJA के ताजा आंकड़े: इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 5 दिनों में देशभर में सर्राफा बाजारों और ज्वेलरी शोरूम्स में ग्राहकों की अच्छी चहल-पहल देखी गई है।
  • कम हुई छूट: त्योहारी सीजन में ग्राहकों का रुझान बढ़ना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। मांग में आई इस तेजी के चलते घरेलू सर्राफा बाजार में सोने पर मिलने वाला डिस्काउंट (छूट) भी अब काफी कम हो गया है।
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