भोपाल की पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर मंगलवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई संभावित है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ओर से उनकी जमानत अर्जी का कड़ा विरोध करते हुए न्यायालय में लिखित आपत्ति पेश की गई है। सीबीआई की तरफ से दलील दी गई है कि यदि इस मामले में अभियुक्त को जमानत का लाभ दिया जाता है, तो वह न्याय प्रक्रिया से दूर भाग सकती हैं। जांच एजेंसी ने यह भी कोर्ट के संज्ञान में लाया कि स्थानीय पुलिस की प्रारंभिक जांच के दौरान सहआरोपी और उनका बेटा फरार हो गए थे।
🔍 सबूतों और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका, जांच में सहयोग न करने का भी आरोप
सीबीआई की ओर से पेश की गई आपत्ति में कहा गया है कि अभियुक्त एक बेहद प्रभावशाली व्यक्ति हैं और जमानत मिलने पर वह गवाहों को प्रभावित करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण सबूतों से छेड़छाड़ भी कर सकती हैं। सीबीआई के अनुसार, अभियुक्त द्वारा जांच में किसी प्रकार का सहयोग नहीं किया जा रहा है। उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जांच को प्रभावित करने और घटनास्थल के साक्ष्यों को मिटाने की भी कोशिश की है। जब साक्ष्य एकत्र किए जा रहे थे, तब उन्होंने सीएफएसएल (CFSL) टीम का भी सहयोग नहीं किया था। इसके अलावा, आवाज के नमूने (Voice Samples) लेने की प्रक्रिया के दौरान भी उनके द्वारा सहयोग नहीं दिए जाने की बात कही गई है।
📂 कई अन्य पहलुओं पर अभी की जानी है जांच, पर्याप्त साक्ष्य मौजूद
जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि इस सनसनीखेज मामले से जुड़े कुछ अन्य पहलुओं पर भी अभी आगे जांच की जानी बाकी है। इस बात की पूरी संभावना है कि यदि याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह न्याय प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं। सीबीआई का यह भी कहना है कि अभियुक्त के खिलाफ मामले में पर्याप्त और पुख्ता साक्ष्य उपलब्ध हैं, जो उनकी संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं।
🏛️ क्या है पूरा मामला? बहु की आत्महत्या और अग्रिम जमानत रद्द होने की कहानी
यह पूरा मामला भोपाल की पूर्व जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहू ट्विशा शर्मा से जुड़ा है, जिन्होंने 12 मई को कथित तौर पर अपने घर में आत्महत्या कर ली थी। इस दुखद घटना के बाद पुलिस ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे के खिलाफ मामला दर्ज किया था। शुरुआती दौर में पूर्व न्यायाधीश को इस प्रकरण में अग्रिम जमानत का लाभ मिल गया था, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसके अलावा, मृतका का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग को लेकर भी हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
🏥 एम्स (AIIMS) की टीम से दोबारा पोस्टमार्टम और अग्रिम जमानत हुई थी निरस्त
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की विशेष टीम से मृतका का दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को मिली हुई अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया था। राज्य सरकार ने इस बहुचर्चित प्रकरण की जांच बाद में सीबीआई को सौंप दी थी, जिसके बाद से पूर्व जज गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।

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