खाड़ी में एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हालात बनते जा रहे हैं. अमेरिका ने कल गुरुवार को हमले तेज करते हुए ईरान के उत्तरी क्षेत्र के ज्यादातर हिस्से को निशाना बनाया. साथ ही पुलों पर भी हमला बोला. अब ईरान की ओर से पलटवार किया जा रहा है और उसने पश्चिम एशिया में अमेरिका के कई सहयोगी देशों को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ हवाई हमले किए.
तेहरान की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई में आज शुक्रवार तड़के बहरीन, कतर और कुवैत पर हमले किए गए. इन दोनों देशों में अमेरिकी सेनाएं मौजूद हैं और हाल के दिनों में उन पर कई बार हमले हो चुके हैं. खाड़ी में जारी जंग को खत्म करने को लेकर ईरान और अमेरिका में शांति समझौता हो गया था. लेकिन होर्मुज स्ट्रेट में दोनों ओर से जारी गतिविधियों की वजह से जंग फिर से शुरू हो गई.
अमेरिका के हमले के जवाब में हमला
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने आज शुक्रवार को बताया कि दक्षिणी होर्मुजगन प्रांत में पुलों को निशाना बनाकर किए गए अमेरिका हवाई हमलों में कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई. इससे पहले गुरुवार को अमेरिका ने फिर से ईरान के खिलाफ हमले तेज कर दिए.
अमेरिका ने उत्तर में और दूर के ठिकानों पर हवाई हमले किए और एक ऐसे जहाज पर भी हमला किया जिस पर वाशिंगटन की ओर से ईरान पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया था. जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों के ऊपर मिसाइलें और ड्रोन दागे.
अमेरिका का हमलों का दूसरा दौर
हिंसा के इस ताजा दौर में पहली बार अमेरिकी हमले का दायरा ईरान की राजधानी तेहरान के आस-पास के इलाकों तक भी पहुंचा, जिससे पता चलता है कि अमेरिकी हमले अब और अधिक ठिकानों पर किए जा रहे हैं. अमेरिका ने गुरुवार देर रात हमलों का दूसरा दौर शुरू किया और कहा कि इसका मकसद ईरान की सैन्य क्षमताओं को “और कमजोर करना” है.
इससे पहले जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अचानक युद्ध शुरू किया, तो तेहरान ने जवाब में जहाजों की आवाजाही के लिए होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से बंद कर दिया. लेकिन इस वजह से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और गैस को लेकर वैश्विक स्तर पर संकट बढ़ गया.
दायरा बढ़ा तो ईरान तेज करेगा हमला
ईरानी सेना के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता कर्नल इब्राहिम ज़ोलफ़गारी ने धमकी दी कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बार-बार दी गई चेतावनियों पर अमल करते है- जिसमें कहा गया है कि अमेरिका ईरानी पुलों और बिजली संयंत्रों पर हमला कर सकता है, तो ईरान “क्षेत्र के सभी बुनियादी ढांचों” पर बड़े पैमाने पर हमले कर सकता है.
उन्होंने कहा, “हम किसी भी हालत में और किसी भी तरह से अमेरिका को, जो एक विदेशी और क्षेत्र से बाहर का देश है, होर्मुज में दखल नहीं देने देंगे. यह ईरान की अभेद्य ‘रेड लाइन’ है.” अमेरिका और ईरान दोनों ने हमले किए हैं क्योंकि नाकेबंदी फिर से लागू कर दी गई है.
ईरान के सरकारी मीडिया ने कल कहा था कि गुरुवार को अमेरिका ने तेहरान और सेमनन प्रांत के आसपास हमले किए. सेमनन प्रांत में ही ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की जगह और स्पेस प्रोग्राम का केंद्र है. सरकारी मीडिया ने यह भी बताया कि हमदान, होर्मोजगन, खुजेस्तान, लोरेस्तान, मरकाजी और सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांतों के साथ-साथ होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के केशम द्वीप पर भी हमले हुए.
पुल-रेलवे स्टेशनों पर US कर रहा हमला
ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, बंदर अब्बास बंदरगाह शहर के अल्लाह-अकबर हिल रिहायशी इलाके में अमेरिकी हमले में 7 लोग घायल हो गए. बंदर अब्बास रेलवे जंक्शन स्टेशन पर अमेरिकी हमले में 2 और लोग घायल हुए. बंदर अब्बास के ठीक पश्चिम में, स्थानीय लोगों ने बताया कि अमेरिकी हमले में 2 पुलों पर भी निशाना साधा गया, जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई और 9 अन्य घायल हो गए.
पिछले महीने दोनों देशों के बीच जंग रोकने को लेकर अंतरिम युद्धविराम समझौता किया गया, लेकिन कुछ दिनों में ही टूट भी गया. और होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के लिए अमेरिका और ईरान के बीच कई दिनों से एक-दूसरे पर हमले हो रहे हैं. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका के ताजा हमलों में 35 से अधिक लोग मारे गए और 300 से अधिक घायल हुए हैं. खाड़ी में तनाव से फिर गहराता जा रहा है क्योकि अमेरिका ने बुधवार को ईरानी बंदरगाहों पर फिर से नौसैनिक घेराबंदी लागू कर दी.

More Stories
Trump Drone Import Tariff: अमेरिका में ड्रोन के इंपोर्ट पर भारी टैरिफ, ट्रंप बोले— राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विदेशी निर्भरता खतरनाक
USCIS Paperless Immigration: अमेरिकी इमिग्रेशन हुआ डिजिटल; 12 अगस्त 2026 से लागू हो रहे नियमों का भारतीयों पर क्या पड़ेगा असर?
Iran vs USA Tensions: ट्रंप के सामने झुकने से ईरान का साफ इनकार, 2029 तक जारी रहेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का गतिरोध