हीना तिवारी, उज्जैन: विश्व प्रसिद्ध श्री बाबा महाकालेश्वर के मंदिर उज्जैन में देश मे सबसे पहले सभी त्यौहार मनाये जाते हैं। त्यौहार की शुरुआत बाबा महांकाल के आंगन से ही होती हैं। आज दीपावली पर्व पर बाबा महाकाल के मंदिर में पुजारियों द्वारा सबसे पहले बाबा महाकाल के समक्ष दीपावली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। बाबा की भस्मारती में फुलझड़ी चलाकर दीपावली मनाई गई।
बाबा महाकाल के आँगन में आज रविवार को दीपावली पर्व की शुरुआत हुई। रूप चौदस व अमावस्या एक ही दिन होने के चलते अल सुबह भस्म आरती में रूप चौदस को उबटन अर्पित कर सुबह होने वाली भस्मारती में महाकाल को अभ्यंग स्नान कराया। इसके बाद अन्नकूट लगाया गया।
बाबा महाकाल के गर्भगृह में भस्म आरती के दौरान पण्डे पुजारीयो द्वारा गर्भगृह में फुलझड़ी जलाकर भगवान महाकाल के मंदिर से दीपावली पर्व की शुरुआत की। आरती के दौरान फुलझड़ियां जलाकर दीपावली पर्व मनाया गया।
भस्म आरती के दौरान सबसे पहले महाकाल को पंचामृत स्नान कराने के बाद रूप चतुर्दशी पर पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान को केसर चंदन इत्र का उबटन लगाया। पुजारी भगवान ने भगवान को गर्म जल से स्नान कराने के पश्चात कपूर आरती की। साल में एक दिन रूप चतुर्दशी पर पुजारी परिवार की
महिलाएं भगवान का रूप निखारने के लिए उबटन लगाकर आरती करती हैं। स्नान के बाद महाकाल को नए वस्त्र, आभूषण धारण कराकर आकर्षक श्रृंगार किया। इसके बाद अन्नकूट भोग लगाकर फुलझड़ी से आरती की।
ज्योर्तिलिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में दीपावली के अवसर पर दो बार अन्नकूट का भोग लगाया जाएगा। पहले रविवार को तड़के भस्मारती के बाद पुजारी परिवार भगवान महाकाल को अन्नकूट का भोग लगाया है वहीं सुबह भोग आरती के दौरान श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा भगवान को अन्नकूट का भोग लगाया जाएगा। इस दौरान पुजारी, पुरोहित फूलझड़ी जलाकर पुजारी महाकाल के दरबार में दीपावली पर्व मनाएंगे। दर्शनार्थियों को सुबह 6 से 8 बजे तक अन्नकूट के दर्शन हो सकेंगे।
अलसुबह होने वाली भस्मारती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और आरती के दौरान फुलझड़ी से बाबा महाकाल की आरती कर दीपावली की शुरुआत बाबा महाकाल के साथ कर धन्य हुए और हर्षोल्लास से दीपावली मनाई। आरती के दौरान सभी श्रद्धालु काफी प्रसन्न नजर आए। श्रद्धालुओं में अलग ही उत्साह नजर आया। बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालुओ ने भी आरती के दौरान फुलझड़ियां जलाकर उत्साहपूर्वक बाबा महाकाल के साथ दीपावली मनाते हुए पर्व की शुरुआत की।

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