छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में मानसून की अनिश्चितता और बारिश की कमी से जूझ रहे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।पहले ही कम वर्षा के कारण मक्के की फसल प्रभावित हो रही थी, लेकिन दो दिन पहले आए तेज आंधी और तूफान ने खेतों में खड़ी फसल को पूरी तरह धराशायी कर दिया। इससे जिले के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। फसल बर्बाद होने से परेशान सोनपुर क्षेत्र के दर्जनों महिला और पुरुष किसान कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और प्रशासन से जल्द से जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की गुहार लगाई।
🏚️ कम बारिश से पहले ही कमजोर थी फसल: रबी सीजन की बोवनी पर भी मंडराया संकट
कलेक्टर कार्यालय पहुंचे सोनपुर के किसानों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि इस वर्ष औसत से कम बारिश होने के कारण मक्के के भुट्टे पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए थे।
किसान शिवम साहू ने बताया, “कम बारिश की वजह से मक्के की फसल पहले से ही कमजोर थी। भुट्टों का आकार छोटा रह गया और दाने भी सही तरीके से नहीं पके। ऊपर से अचानक आई आंधी ने बची-कुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया।” किसानों ने चिंता व्यक्त की कि बारिश न होने के कारण आगामी रबी सीजन की फसलों (गेहूं, चने आदि) के लिए भी सिंचाई का जल संकट पैदा हो जाएगा। पीड़ित किसानों ने ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के तहत प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में बीमा राशि का भुगतान करने की मांग की है।
🚜 जिले में 4 लाख हेक्टेयर में लगी है मक्के की फसल: छिंदवाड़ा और चौरई बेल्ट सबसे ज्यादा प्रभावित
उल्लेखनीय है कि छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश का प्रमुख मक्का उत्पादक जिला माना जाता है।
कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में जिले के करीब 4 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्के की बुआई की गई थी। हालिया आंधी-तूफान का सबसे भयंकर असर छिंदवाड़ा और चौरई तहसील के ग्रामीण इलाकों में देखने को मिला है, जहां शत-प्रतिशत फसल जमीन पर गिर गई है। फसल गिरने से न केवल उपज और गुणवत्ता में भारी गिरावट आएगी, बल्कि कटाई के समय हार्वेस्टिंग की भी गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
👨🌾 हार्वेस्टर चलना हुआ नामुमकिन: मजदूरों की किल्लत से बढ़ी किसानों की चिंता
किसानों का कहना है कि खेत में सीधी खड़ी फसल की कटाई हार्वेस्टर मशीन के जरिए आसानी से और कम लागत में हो जाती है।
हालांकि, फसल के जमीन पर गिर जाने के बाद अब हार्वेस्टर मशीन चलाना संभव नहीं है। ऐसे में केवल मानवीय श्रम (मजदूरों) के जरिए ही गिरी हुई फसल से भुट्टे तोड़े जा सकते हैं। लेकिन ग्रामीण इलाकों में एक साथ भारी संख्या में मजदूरों का मिलना बेहद मुश्किल है, जिससे फसल खराब होने का जोखिम और अधिक बढ़ गया है।
📋 प्रभावित इलाकों में सर्वे का काम शुरू: एसडीएम सुधीर जैन ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
किसानों की समस्याओं और कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपने के बाद प्रशासनिक अमला तुरंत एक्शन मोड में आ गया है।
इस पूरे मामले पर छिंदवाड़ा एसडीएम (SDM) सुधीर जैन ने बताया, “आंधी-तूफान से फसल को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए प्रभावित इलाकों में सर्वे का काम तत्काल प्रभाव से शुरू कर दिया गया है। संबंधित क्षेत्रों के तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पटवारियों को खेतों का निरीक्षण कर पंचनामा तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सर्वे रिपोर्ट तैयार होने के बाद नियमानुसार राहत राशि की कार्रवाई की जाएगी।”

More Stories
Rewa Kidnapping Solved: औलाद की चाहत में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने रची मासूम के अपहरण की साजिश; 100 किमी दूर मिली बच्ची
Bundelkhand Medical College Sagar: गर्भावस्था में खून की कमी बनी जानलेवा! सागर में प्लेसेंटा प्रीविया से पीड़ित महिला की सफल डिलीवरी
Madhya Pradesh Politics News: 9 महीने का इंतजार खत्म! चंद्रशेखर तिवारी संभालेंगे MP बीजेपी संगठन की कमान; नितिन नबीन ने जारी की सूची