August 21, 2026

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Chambal River Contamination: किसानों की फसलें चौपट और पशु-पक्षी भी पीने से कतरारा रहे पानी, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

मध्य प्रदेश के धार और इंदौर जिले की सीमा से गुजरने वाली ऐतिहासिक चंबल नदी इन दिनों अपने अस्तित्व की गंभीर जंग लड़ रही है। जानापाव पहाड़ियों से निकलकर मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक करीब 960 किलोमीटर का लंबा सफर तय करने वाली यह नदी अब पूरी तरह जहरीले केमिकल का शिकार हो चुकी है। नदी की इस बदहाली के पीछे मुख्य जिम्मेदार पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र की कुछ लापरवाह कंपनियां हैं, जो मानसून के शुरू होते ही नदी में जहर घोलने का काम कर रही हैं।

🌧️ बारिश के पानी का इंतजार करती हैं फैक्ट्रियां, काला पड़ चुका है नदी का पानी

स्थानीय लोगों और किसानों के अनुसार, पीथमपुर की ये फैक्ट्रियां बारिश के मौसम का बेसब्री से इंतजार करती हैं। जैसे ही मानसूनी बारिश शुरू होती है और सूखी पड़ी नदी में पानी का बहाव आता है, ये फैक्ट्रियां नालों के जरिए अपना सारा विषैला और प्रदूषित केमिकल युक्त पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के चंबल नदी में छोड़ देती हैं। इस खतरनाक केमिकल के कारण पूरी चंबल नदी का पानी काला और नीला पड़ चुका है। नदी के तटवर्ती गांवों के कुएं, हैंडपंप और अन्य पेयजल स्रोत भी पूरी तरह से दूषित हो चुके हैं।

🌾 जलीय जीवन और किसानों की फसलें तबाह, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

चंबल नदी में फैले इस अंधाधुंध प्रदूषण के कारण जलीय जीवन पूरी तरह से तबाह हो गया है और पानी में ऑक्सीजन की कमी से मछलियां मर रही हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि नदी का पानी इतना जहरीला हो चुका है कि पशु-पक्षी भी इसे पीने से कतराते हैं। देपालपुर के सगडोद, अचाना और मुंडाना गांवों में ओवरफ्लो होकर खेतों में पहुंचे इस जहरीले पानी से सैकड़ों बीघा क्षेत्र में खड़ी सोयाबीन की फसलें पूरी तरह चौपट हो गई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की उदासीनता के कारण फैक्ट्री संचालकों के हौसले बुलंद हैं। वहीं, धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए अतिशीघ्र जांच दल गठित कर निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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