April 21, 2026

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पीएम आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन व जाने मानें अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय का निधन

नईदिल्ली: देश के जाने-माने अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन बिबेक देबरॉय का 69 साल की उम्र में निधन हो गया। बिबेक देबरॉय ईएमएस में भर्ती थे और आज सुबह उनका निधन हो गया।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये अपना अहम योगदान के लिए पहचाने जाने वाले देबरॉय ने देश की आर्थिक नीतियों को आकार देने में मुख्य भूमिका निभाई। देबरॉय पुणे के गोखले राजनीति एवं अर्थशास्त्र संस्थान के कुलाधिपति के रूप में कार्य कर चुके हैं। वे 5 जून 2019 तक नीति आयोग के सदस्य थे। उन्होंने कई पुस्तकें लिखने के साथ-साथ लेखों का लेखन और संपादन किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देबरॉय के निधन पर शोक जताया है। पीएम मोदी ने कहा,’मैं डॉ. देबरॉय को कई सालों से जानता हूं। मैं उनकी अंतर्दृष्टि और अकादमिक चर्चा के प्रति उनके जुनून को हमेशा याद रखूंगा। उनके निधन से दुखी हूं। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं।
पीएम मोदी ने आगे कहा,’डॉ. बिबेक देबरॉय एक महान विद्वान थे। वह अर्थशास्त्र, इतिहास, संस्कृति, राजनीति, अध्यात्म और अन्य कई क्षेत्रों में पारंगत थे। अपने कामों के जरिए उन्होंने भारत के बौद्धिक परिदृश्य पर एक अमिट छाप छोड़ी है। सार्वजनिक नीति में अपने योगदान के अलावा, उन्हें हमारे प्राचीन ग्रंथों पर काम करना और उन्हें युवाओं के लिए सुलभ बनाना बहुत पसंद था।’

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी बिबेक देबरॉय के निधन पर दुख जाहिर किया है। जयराम ने सोशल मीडिया पर लिखा,’बिबेक देबरॉय सबसे पहले और सबसे अहम सैद्धांतिक और अनुभवी अर्थशास्त्री थे। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया और लिखा। उनके पास स्पष्ट व्याख्या करने का एक विशेष कौशल भी था, जिससे आम लोग जटिल आर्थिक मुद्दों को आसानी से समझ सकें। कई सालों से उनके पास कई संस्थागत जुड़ाव थे, उन्होंने हर जगह अपनी छाप छोड़ी है।

देबरॉय ने रामकृष्ण मिशन स्कूल (नरेंद्रपुर), प्रेसीडेंसी कॉलेज (कोलकाता), दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और ट्रिनिटी कॉलेज (कैम्ब्रिज) से शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज (कोलकाता), गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स (पुणे) और भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (दिल्ली) में काम किया था। उन्होंने कानूनी सुधारों पर वित्त मंत्रालय की यूएनडीपी परियोजना के निदेशक के रूप में भी काम किया था। वे 5 जून, 2019 तक नीति आयोग के सदस्य भी थे। उन्होंने कई किताबें, शोधपत्र और लोकप्रिय लेख लिखे या उन्हें संपादित किया। वे कई समाचार पत्रों के सलाहकार या योगदान संपादक भी रहे हैं।

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