August 23, 2026

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Central Bank of India Loan Scheme: महिला कैदियों के पुनर्वास के लिए आगे आया लीड बैंक, ट्रेनिंग के साथ मिलेगा मुद्रा लोन और मार्केटिंग सपोर्ट

जाने-अनजाने में हुए अपराध के चलते देश और प्रदेश की जेलों में कई महिला कैदी अपने बच्चों के साथ अपनी सजा काट रही हैं। इन महिला कैदियों को सजा पूरी होने के बाद समाज की मुख्यधारा से जोड़ने, उनके बेहतर पुनर्वास और बच्चों के पालन-पोषण के उद्देश्य से जेल विभाग द्वारा समय-समय पर विभिन्न प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण दिए जाते हैं, ताकि वे रिहाई के बाद अपना खुद का स्वरोजगार स्थापित कर सकें और दोबारा अपराध की दुनिया की तरफ रुख न करें। इसी महत्वपूर्ण पहल के तहत सागर केंद्रीय जेल में सजा काट रही दर्जनों महिला कैदियों को ‘क्रिएटिव ज्वेलरी आर्ट’ (Creative Jewellery Art) का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

🏦 लीड बैंक और जेल प्रशासन की अनूठी पहल, ट्रेनिंग के बाद मिलेगा लोन और मार्केटिंग का सपोर्ट

सागर केंद्रीय जेल में यह विशेष 14 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सागर जिले के लीड बैंक ‘सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया’ के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इस ट्रेनिंग के दौरान महिलाओं को विभिन्न प्रकार की आकर्षक राखियां और आर्टिफिशियल (कृत्रिम) ज्वेलरी बनाना सिखाया जा रहा है। जब महिला कैदी इस कला में पूरी तरह पारंगत हो जाएंगी और उनकी सजा पूरी होगी, तब बैंक द्वारा उन्हें स्वरोजगार स्थापित करने के लिए ‘मुद्रा योजना’ के तहत 50 हजार से 1 लाख रुपये तक का लोन आसानी से दिलाया जाएगा। इतना ही नहीं, बैंक और जेल प्रशासन मिलकर उनके द्वारा तैयार उत्पादों की मार्केटिंग, बाजार की उपलब्धता और अगले 2 वर्षों तक उनके व्यवसाय में आने वाली हर छोटी-बड़ी परेशानी को हल करने में पूरी मदद करेगा। सेंट्रल बैंक की ओर से किरण यादव और मनोज प्रजापति ने बताया कि वे केवल ट्रेनिंग देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करते, बल्कि अगले 2 साल तक लगातार उनका फॉलोअप भी लिया जाता है।

👩‍👧‍👦 जेल में महिला कैदियों का पुनर्वास और त्योहारों की मांग को ध्यान में रखकर उठाया गया कदम

सागर केंद्रीय जेल के महिला वार्ड में औसतन 70 से 80 महिला बंदी (सजायाफ्ता और विचाराधीन) हमेशा मौजूद रहती हैं। इनमें से कई महिलाओं के छोटे बच्चे भी होते हैं, जिनकी परवरिश और सजा के बाद उनका पुनर्वास करना जेल प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसी समस्या से निपटने के लिए जेल अधीक्षक आर.सी. आर्य के मार्गदर्शन में सिलाई, पापड़ निर्माण और अब आर्टिफिशियल ज्वेलरी बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। चूंकि वर्तमान में त्योहारों का सीजन नजदीक है और आने वाले नवरात्र व गरबा उत्सव में आर्टिफिशियल ज्वेलरी की बाजार में जबरदस्त मांग रहती है, इसलिए महिलाओं को बाजार की जरूरत के हिसाब से प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वेजेल से बाहर निकलते ही अपनी आजीविका का साधन जुटा सकें।

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