भारतीय शेयर बाजार में पिछले काफी समय से जारी उठापटक और लगातार गिरते स्तर ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि, कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन शुक्रवार को बाजार ने थोड़ी राहत की सांस ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर तुरंत हमले की संभावना से इनकार किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) के दामों में कुछ नरमी आई, जिसका सकारात्मक असर घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला।
🌐 ग्लोबल दबाव और एफआईआई की बिकवाली बनी मुख्य चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत फंडामेंटल्स और कंपनियों के अच्छे वित्तीय नतीजों के बावजूद वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितताएं बाजार पर भारी पड़ रही हैं। लगातार नौ हफ्तों तक बाजार में गिरावट का दौर देखा गया है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, ऊंचे बॉन्ड यील्ड और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली के कारण रिकवरी की रफ्तार थोड़ी सुस्त पड़ी है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिन कंपनियों के उत्पादों की मांग बाजार में बनी हुई है, वे इस दौर में सबसे मजबूत बनकर उभरेंगी।
🏦 विदेशी निवेशकों के लौटते ही बैंकिंग शेयरों में आएगी जोरदार तेजी
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में दोबारा खरीदारी शुरू करेंगे, तो सबसे तेज उछाल बैंकिंग शेयरों में देखने को मिलेगा। पिछले कुछ हफ्तों में भारी बिकवाली के चलते बड़े बैंकों के शेयर बेहद आकर्षक और सस्ते वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं। इनकी एसेट क्वालिटी और कैपिटल ग्रोथ बेहद मजबूत बनी हुई है। इसके अलावा, निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे पूरे इंडेक्स को देखने के बजाय चुनिंदा सेक्टर्स और मजबूत बुनियादी सेहत वाली कंपनियों पर फोकस करें।

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