देश मे लगातार कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आते रहती हैं। स्ट्रीट डॉग्स के हमले में कई बार लोगो को जान तक गवाना पड़ी हैं ओर कई लोग गंभीर घायल भी हुए हैं। देश के लगभग हर हिस्से से कुत्तों के काटने की खबरे आती रहती हैं।
इसी बीच पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश देते हुए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को आवारा कुत्तों द्वारा किए गए हमलों या दुर्घटनाओं के मामलों में दिए जाने वाले मुआवजे पर निर्णय लेने के लिए समिति बनाने को कहा है।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मिसाल कायम करते हुए बड़ा फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि कुत्तों और मवेशियों जैसे आवारा जानवरों के हमलों के मामलों में मुआवजा देने के लिए राज्य मुख्य रूप से जिम्मेदार होगा।
ऑर्डर में कहा गया है कि कुत्ते के काटने के मामलों में न्यूनतम सहायता 10,000 रुपये प्रति दांत के निशान और 0.2 सेमी घाव पर न्यूनतम 20,000 रुपये प्रति घाव का मआवजा देना होगा। कोर्ट ने आवारा जानवरों के हमलों से संबंधित 193 याचिकाओं पर सुनवाई की है।
यह फैसला देश में आवारा कुत्तों की समस्या पर चल रही भारी बहस के बीच आया है। इसी साल अक्टूबर में वाघ बकरी चाय कंपनी ग्रुप के कार्यकारी निदेशक पराग देसाई की मौत आवारा कुत्तों के हमले के बाद हो गई थी। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी और आवारा कुत्तों के हमलों पर लोगों का ध्यान गया। लोगों ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की जा रही है।
इसी बीच हाईकोर्ट ने मुआवजे की मांग करने वाली एक याचिका पर अपने आदेश में कहा कि मुख्य रूप से राज्य की एजेंसियां/उपकरण/या निजी व्यक्ति यदि कोई हो, इसे वसूलने के अधिकार के साथ मुआवजा देने के लिए भी जिम्मेदार होगा। पंजाब और हरियाणा सहित केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ को मुआवजे के लिए समिति बनाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

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