भारत (India) की पहली ऑस्कर विजेता (Oscar Winner) और सिनेमा (Cinema) जगत की जानी-मानी कॉस्ट्यूम डिजाइनर (Costume Designer) भानू अथैया (Bhanu Athaiya) का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वो ब्रेन ट्यूमर (Brain Tomer) की वजह से बीते 3 सालों से बिस्तर पर थीं और गुरुवार सुबह नींद में ही उनकी मौत हो गई।
भानू अथैया (Bhanu Athaiya) को साल 1982 में रिलीज़ हुई फ़िल्म गांधी में कॉस्ट्यूम डिज़ाइन (Costume Designer) करने के लिए ऑस्कर पुरस्कार (Oscar Winner) दिया गया था। इस फ़िल्म को ब्रिटिश निर्देशक रिचर्ड ऑटेनबॉरो ने बनाया था। 50 के दशक से भारतीय सिनेमा (Indian Cinema) में सक्रिय भानू अथैया (Bhanu Athaiya) ने 100 से ज़्यादा फ़िल्मों के लिए कॉस्ट्यूम डिज़ाइन (Costume Designer) किए। ऑस्कर (Oscar) के अलावा उन्हें 2 राष्ट्रीय पुरस्कार (National Award) भी मिले हैं।
इन फिल्मों के बाद नहीं किया काम
आमिर ख़ान (Aamir Khan) की फ़िल्म लगान (Lagaan) और शाहरुख ख़ान (Shahrukh Khan) की फ़िल्म स्वदेस (Swadesh) में उन्होंने आखिरी बार कॉस्ट्यूम डिज़ाइन (Costume Designer) किए थे। साल 2012 में भानु अथैया (Bhanu Athaiya) ने ऑस्कर ट्रॉफी (Oscar Trophy) को लौटाने की इच्छा जताई थी, वो चाहती थीं कि उनके जाने के बाद ऑस्कर ट्रॉफी (Oscar Trophy) को सुरक्षित स्थान पर रखा जाए।
भानू अथैया ने कहा था कि सबसे बड़ा सवाल ट्रॉफी (Oscar Trophy) की सुरक्षा का है, भारत में पहले कई अवॉर्ड गायब हुए है। मैने इतने सालों तक अवॉर्ड को इंजॉय किया है, चाहती हूँ कि वो आगे भी सुरक्षित रहे।
Oscar को लेकर कहीं थी यह बात
उन्होंने कहा था कि मैं अक्सर ऑस्कर (Oscar) ऑफिस जाती हूँ, मैने देखा कि वहां कई लोगों ने अपने ट्रॉफी रखे हैं। अमरीकी कॉस्ट्यूम डिजाइनर (Costume Designer) एडिथ हेड ने भी मरने से पहले अपने 8 ऑस्कर ट्रॉफियों को ऑस्कर (Oscar) ऑफिस में रखवाया था।
भानू अथैया ने ऑस्कर (Oscar) समारोह की उस शाम को याद करते हुए कहा था कि डोरोथी शिंडलेयर पवेलियन में हो रहे समारोह में गाड़ी से मेरे साथ फिल्म के लेखक भी जा रहे थे। उन्होंने कहा था कि उन्हें लगता है कि अवॉर्ड (Award) मुझे ही मिलेगा।
साल 1983 के ऑस्कर समारोह में बैठे दूसरे डिज़ाइनर्स (Designer) भी यही कह रहे थे कि अवॉर्ड मुझे ही मिलेगा। मैंने पूछा कि ऐसा इतने विश्वास से आप कैसे कह सकते हैं? इस सवाल पर उन लोगों ने मुझे जवाब दिया कि आपकी फिल्म का दायरा इतना बड़ा है कि उससे हम प्रतियोगिता नहीं कर सकते है।
अवार्ड (Award) लेते वक्त मैंने सिर्फ यही कहा था कि मैं सर रिचर्ड ऑटेनबरो का शुक्रिया अदा करती हूँ कि उन्होंने दुनिया का ध्यान भारत की तरफ खींचा। धन्यवाद अकादमी। भानू चित्रकारी में गोल्ड मेडेलिस्ट भी थीं और यही वजह थी कि रिचर्ड ऑटेनबॉरो ने उन्हें अपनी फ़िल्म में चुना था।

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