मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर और बिरसा विकासखंड के बैगा अंचल में मासूम बच्चों की दर्दनाक मौतों ने अब एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। एक तरफ जहाँ राज्य सरकार प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को तेजी से मजबूत करने और पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद पहुँचाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष मौतों के आंकड़ों, स्वास्थ्य विभाग की कथित लापरवाही और क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर बना हुआ है। इसी सिलसिले में शनिवार को जनजातीय कार्य विभाग मंत्री कुंवर विजय शाह और कांग्रेस नेता विक्रांत भूरिया ने प्रभावित ग्राम कुंडेकसा का दौरा किया। इससे पहले कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी इन क्षेत्रों का दौरा कर पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा कर चुके हैं।
🩺 “हर बच्चा महत्वपूर्ण, इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार”—मंत्री विजय शाह
शनिवार को बैगा बहुल ग्राम कुंडेकसा पहुंचे जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्येक मौत को बेहद गंभीरता से ले रही है और आंकड़ों पर बहस करने के बजाय उनके लिए एक-एक बच्चे का जीवन अनमोल है। उन्होंने घोषणा की कि बच्चों के स्वास्थ्य में पूरी तरह सुधार होने तक उनके इलाज और आवश्यक सुविधाओं का पूरा खर्च जनजातीय कार्य विभाग द्वारा उठाया जाएगा, जिसके लिए जल्द ही विभाग की ओर से फंड भी जारी किया जाएगा। वहीं, क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और बदहाली के सवाल पर मंत्री शाह ने लंबे समय तक रहे नक्सल प्रभाव को मुख्य जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण पहले डॉक्टर और नर्स वहां जाने से कतराते थे, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और स्वास्थ्यकर्मी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आईसीएमआर (ICMR) की रिपोर्ट में खसरा और मलेरिया संक्रमण की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने रोकथाम की गतिविधियां तेज कर दी हैं।
🔥 नक्सलवाद के तर्क पर कांग्रेस का तीखा हमला—मांगे 10-10 लाख रुपये मुआवजे
मंत्री विजय शाह के नक्सलवाद वाले बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता विक्रांत भूरिया ने सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि जब जिले में नक्सल प्रभाव पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा चुका है, तब भी बैगा अंचल के गांवों में स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और पक्की सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाओं का भारी संकट बना हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पहले स्वास्थ्य सेवाओं की कमी की वजह नक्सलवाद था, तो अब नक्सल प्रभाव समाप्त होने के बाद भी इन गांवों की व्यवस्थाएं क्यों नहीं सुधरीं? इसके साथ ही, बच्चों की मौतों के आंकड़ों को लेकर भी पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। सरकार जहाँ 8 मौतों की पुष्टि कर रही है, वहीं ग्रामीण और कांग्रेस 22 बच्चों की मौत का दावा कर रहे हैं। कांग्रेस ने मृतक परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने, प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य और पोषण सुविधाओं को युद्ध स्तर पर सुधारने की जोरदार मांग की है।

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