उज्जैन: नागरी लिपि परिषद् दिल्ली की मध्य प्रदेश इकाई एवं राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय आभासी गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका विषय हिंदी भाषा एवं नागरी लिपि का विश्व में बढ़ता प्रभाव था।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा उज्जैन, अध्यक्ष, राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना, हिंदी विभागाध्यक्ष एवं कुलानुशासक, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन ने कहा कि दुनिया की भाषाई एकता को देवनागरी लिपि का आधार मिल रहा है। दुनिया में सर्वाधिक व्यक्तियों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम देवनागरी लिपि एवं हिन्दी भाषा है। आज दुनिया के कई देशों के बाज़ारों और हवाई अड्डों पर देवनागरी लिपि का प्रयोग दिखाई देता है।
डॉ. हरिसिंह पाल, महामंत्री नागरी लिपि परिषद्, दिल्ली के जन्म दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में डॉ पाल, सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार ने अपना मंतव्य देते हुए कहा कि, सूचना प्रौद्योगिकी के विकास की वजह से विदेशी भी नागरी लिपि में आसानी से लिख सकते हैं। भारत की आजादी से भी पहले से संयुक्त राष्ट्र संघ से हिंदी भाषा में पत्र निकलता है।
समारोह के अध्यक्ष राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना, संरक्षक ब्रजकिशोर शर्मा, उज्जैन ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता में कई शब्दों को अब हिंदी में लिखना शुरू किया है। डॉ. इसपाक अली ,संयुक्त मंत्री नागरी लिपि परिषद् , बैंगलोर ने कहा, हिंदी सिर्फ साहित्य ही नहीं है। आज मौलिक चिंतन की परम आवश्यकता है।
डॉ. रवि शर्मा, श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स दिल्ली हिंदी विभागाध्यक्ष एवं हिंदी साहित्य सम्मेलन के महामंत्री ने कहा, उच्च शिक्षाओं में हिंदी और भारतीय भाषाओं को पढ़ने पर बढ़ावा देना चाहिए।
राष्ट्रीय संयोजक डॉ. अरुणा शुक्ला, नांदेड़, महाराष्ट्र ने कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से भी हिंदी का प्रचार-प्रसार हो रहा है। डॉ. रणजीत सिंह अरोड़ा , पुणे, महाराष्ट्र ने कहा, जीवन में कुछ ऐसे रिश्ते होते हैं, रिश्तों में आदर सम्मान प्रेम और श्रद्धा होती है, जिन रिश्तों की परिभाषा नहीं होती है, ऐसा ही रिश्ता हिंदी भाषा, नागरी लिपि प्रेमी डॉ. हरिसिंह पाल का है।
श्रीमती श्वेता मिश्रा ,राष्ट्रीय सचिव, राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना, पुणे ने कहा, देवनागरी लिपि में सभी ध्वनियों को अंकित करने की क्षमता है।
डॉ. वेंकटेश्वर राव, हैदराबाद , बैंक में पूर्व सहायक प्रबंधक ने कहा,जिन बोलियां और भाषाओं की लिपि नहीं थी उनको देवनागरी लिपि के साथ जोड़ने के सार्थक प्रयास में सफल होते रहें।
कार्यक्रम का सफल संचालन नागरिक लिपि अध्येता, डॉ. रश्मि चौबे गाजियाबाद राष्ट्रीय प्रवक्ता, राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. संगीता पाल, कच्छ गुजरात, राष्ट्रीय सचिव की सरस्वती वंदना से हुआ, स्वागत भाषण डॉ. शहनाज शेख, राष्ट्रीय महासचिव, राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने दिया, अतिथि परिचय डॉ. प्रभु चौधरी, कोषाध्यक्ष, राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने किया, डॉ. जया सिंह, छत्तीसगढ़ ने आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में प्रो. एस पी गर्ग, शिकागो, ओम सपरा दिल्ली, डॉ. अरुण सराफ इंदौर, डॉ. अजय कुमार ओझा दूरदर्शन में निर्देशक, सुप्रीम कोर्ट में वकील, डॉ. भगवती प्रसाद निदारिया, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के केंद्रीय हिंदी निदेशालय के पूर्व उपनिदेशक, डॉ. चंद्रशेखर सिंह, छत्तीसगढ़ से, इस्पाक अली खान दिल्ली से दूरदर्शन में कार्यरत मिर्जापुर से, डॉ ममता, डॉ. अनीता, अनंत कृष्णन अमेरिका आदि अन्य अनेक विद्वानों ने डॉ पाल के जन्म दिवस की बधाई देते हुए कविताएं सुनाईं एवं अपने विचार व्यक्त किए।

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