October 16, 2026

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Ahilyabai Bunkar Mela Shahdol: चंदेरी साड़ी से लेकर छतवई के काष्ठ शिल्प तक, शहडोल मेले में उमड़ी खरीदारों की भीड़

शहडोल जिला मुख्यालय के जय स्तंभ चौक के पास आयोजित ‘देवी अहिल्याबाई बुनकर मेले’ का भव्य समापन हुआ। 8 अक्टूबर से शुरू हुए इस मेले में मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए बुनकरों, कारीगरों और स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के हैंडलूम व हस्तशिल्प प्रोडक्ट्स की जमकर बिक्री हुई। मेले में खासकर चंदेरी और महेश्वरी साड़ियों की जबरदस्त मांग देखने को मिली। इसके अलावा शहडोल के छतवई स्थित हस्तशिल्प एवं हथकरघा केंद्र के कलाकारों द्वारा बनाई गई लकड़ी की नक्काशीदार कलाकृतियों को देखने और खरीदने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।

🛍️ प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुँचे स्व-सहायता समूह, संयुक्त कमिश्नर ने प्रमाणपत्र देकर बढ़ाया हौसला

मेले में रीवा, सीधी, शहडोल, उमरिया, उज्जैन, मंदसौर, खंडवा, चंदेरी, ग्वालियर, सीहोर और बुदनी सहित अनेक जिलों के स्व-सहायता समूहों और हस्तशिल्पियों ने स्टॉल लगाए थे। मेले में चंदेरी व महेश्वरी साड़ियों के अलावा बुटीक प्रिंट सूट्स, स्टोन ज्वेलरी, ब्लॉक प्रिंट साड़ियां, चमड़े के पर्स व बेल्ट, तरुशिल्प, कोसा साड़ियां और जरी-जरदोजी के सामानों की रिकॉर्ड खरीदारी हुई। कार्यक्रम में शामिल हुए संयुक्त कमिश्नर मुद्रिका सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजनों से ग्रामीण कारीगरों और महिलाओं का मनोबल बढ़ता है तथा उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागी बुनकरों व महिलाओं को प्रमाणपत्र भी वितरित किए गए।

🪵 छतवई के काष्ठ शिल्प और हस्तनिर्मित कालीनों की भारी मांग, कलाकारों को मिला बेहतरीन मंच

मेले में शहडोल के छतवई हस्तशिल्प एवं हथकरघा केंद्र के कलाकारों की लकड़ी से बनी कलाकृतियां आकर्षण का मुख्य केंद्र रहीं। विशेषकर लकड़ी पर उकेरी गई भगवान गणेश की मूर्तियां, पारंपरिक मुखौटे और सजावटी सामानों की लोगों ने जमकर खरीदारी की। छतवई केंद्र के इंचार्ज एस. एस. पांडे ने बताया कि मेले में कारीगरों द्वारा बनाए गए कालीन और दरियों को भी ग्राहकों ने खूब सराहा। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने और उचित मूल्य पर बेचने के लिए एक मजबूत मंच मिलता है, जिससे उनका उत्साहवर्धन होता है।

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