May 16, 2026

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फर्जी गोल्ड लोन स्लिप से 18 लाख की ठगी कर रफूचक्कर हो गया नटवरलाल, ढूंढते रह गए बैंक वाले

सागर: अगर कोई व्यक्ति बैंक की फर्जी स्लिप तैयार कर, उस पर मैनेजर के नकली हस्ताक्षर और बैंक की फर्जी सील लगाकर दूसरी बैंक को झांसा दे और लाखों रुपये लेकर फरार हो जाए, तो यह सुनने में किसी फिल्मी कहानी जैसा लगता है। लेकिन मप्र के सागर में ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग व्यवस्था की सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला सागर के गोपालगंज थाना क्षेत्र का है, जहां दमोह जिले के एक युवक ने गोल्ड लोन ट्रांसफर के नाम पर 18 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली और अब फरार है। घटना सामने आने के बाद दोनों संबंधित बैंकों में हड़कंप मच गया, वहीं पुलिस आरोपी की तलाश में जुट गई है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, फरियादी सतीष कुमार यादव ने गोपालगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि दमोह जिले के ग्राम समन्ना, पोस्ट आमखेड़ा निवासी घनश्याम रैकवार ने 23 मार्च को बैंक से संपर्क कर गोल्ड लोन ट्रांसफर कराने की बात कही।
आरोपी ने खुद को एक बैंक का ग्राहक बताते हुए कहा कि उसका लोन ईएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक की गोपालगंज शाखा में चल रहा है। उसने दावा किया कि वहां ब्याज दर अधिक है, इसलिए वह अपना लोन मणप्पुरम फाइनेंस लिमिटेड में ट्रांसफर कराना चाहता है। उसने 18 लाख रुपये का लोन और करीब 50 हजार रुपये ब्याज बकाया होने की जानकारी दी।

इस पूरी साजिश के तहत आरोपी ने पहले ही एक फर्जी गोल्ड लोन स्लिप तैयार कर ली थी। इस स्लिप पर बैंक मैनेजर के नकली हस्ताक्षर किए गए थे और बैंक की फर्जी सील भी लगाई गई थी, जिससे दस्तावेज बिल्कुल असली प्रतीत हो रहे थे। आरोपी ने बड़ी चालाकी से इन दस्तावेजों को मणप्पुरम फाइनेंस की शाखा में प्रस्तुत किया। 24 मार्च को घनश्याम रैकवार शाखा पहुंचा और लोन ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी कराई। बैंक अधिकारियों ने प्रस्तुत दस्तावेजों को सही मानते हुए प्रक्रिया आगे बढ़ाई और 18 लाख 50 हजार रुपये की राशि आरोपी के खाते में ट्रांसफर कर दी।
राशि ट्रांसफर होते ही आरोपी ने नया बहाना बनाया। उसने कहा कि वह पहले ईएसएएफ बैंक से अपना खाता बंद कराएगा और फिर गोल्ड लेकर आएगा, जिसके आधार पर नया लोन प्रोसेस पूरा किया जाएगा। यह कहकर वह वहां से चला गया और फिर वापस नहीं लौटा।
कई दिन बीत जाने के बाद जब आरोपी गोल्ड लेकर नहीं पहुंचा, तो बैंक अधिकारियों को संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने ईएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक से संपर्क कर दस्तावेजों की पुष्टि की। जांच में खुलासा हुआ कि जिस स्लिप के आधार पर लोन ट्रांसफर किया गया, वह पूरी तरह फर्जी है और संबंधित नाम से उस बैंक में कोई लोन खाता ही नहीं है।
यह जानकारी मिलते ही मणप्पुरम फाइनेंस के अधिकारियों के होश उड़ गए। तुरंत आरोपी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उसका मोबाइल फोन बंद मिला और वह फरार हो चुका था।

घटना के बाद बैंक प्रबंधन ने गोपालगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी घनश्याम रैकवार के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की लोकेशन ट्रेस की जा रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
यह मामला बैंकिंग प्रणाली में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते दस्तावेजों की गहन जांच की जाती, तो इस तरह की ठगी को रोका जा सकता था। इस घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि ठग अब नई-नई तकनीकों और तरीकों का इस्तेमाल कर बैंकों को निशाना बना रहे हैं।

फिलहाल पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने यह फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार किए और क्या इस धोखाधड़ी में कोई और भी शामिल है।

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