कैंसर का नाम सुनते ही आमतौर पर लोग शरीर के किसी खास अंग में बनी गांठ या ट्यूमर के बारे में सोचते हैं. लेकिन कुछ कैंसर ऐसे भी होते हैं जो पेट के अंदर मौजूद अंगों को ढकने वाली पतली परत यानी पेरिटोनियम को प्रभावित करते हैं. इसे पेरिटोनियल कैंसर कहा जाता है. कई मामलों में यह कैंसर स्वयं पेरिटोनियम से शुरू हो सकता है, जबकि अधिकतर पेरिटोनियल कैंसर जैसी स्थिति किसी अन्य कैंसर के पेट की अंदरूनी परत तक फैलने के कारण होती है. पेट, आंत, अपेंडिक्स और कुछ अन्य कैंसर पेरिटोनियम तक फैल सकते हैं.
पेट में होने वाली दिक्कतों को लोग नॉर्मल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. ऐसा ही कुछ पेरिटोनियल कैंसर के साथ भी होता है. चलिए आपको डॉक्टर के जरिए बताते हैं ये कितना खतरनाक है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए?
पेरिटोनियम क्या है?
पेरिटोनियम पेट की अंदरूनी दीवार और पेट के अधिकांश अंगों को ढकने वाली एक पतली झिल्ली है. जब कैंसर कोशिकाएं इस सतह पर फैलकर कई जगह छोटी-बड़ी गांठें बनाने लगती हैं, तो इसे पेरिटोनियल कार्सिनोमैटोसिस कहा जाता है. यह आमतौर पर बीमारी के अधिक उन्नत चरण का संकेत हो सकता है.
शुरुआत में लक्षण क्यों पकड़ में नहीं आते?
पेरिटोनियल कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य पेट की समस्याओं जैसे लगते हैं. पेट फूलना, गैस, अपच या कब्ज जैसी शिकायतों को लोग लंबे समय तक नजरअंदाज कर देते हैं. यही कारण है कि लगातार बने रहने वाले या धीरे-धीरे बढ़ते लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए.
इसके प्रमुख लक्षणों में—
पेट का लगातार फूलना या आकार बढ़ना
पेट में दर्द, भारीपन
थोड़ा खाना खाने के बाद ही पेट भर जाने का एहसास
भूख कम लगना
बिना कोशिश के वजन कम होना
लगातार थकान और कमजोरी
मतली या उल्टी
कब्ज या दस्त जैसी आंतों की आदत में बदलाव
पेट में पानी भरना यानी एसाइटिस
बीमारी बढ़ने पर आंत में रुकावट और भोजन या गैस पास करने में परेशानी
यह कैंसर कितनी तेजी से फैल सकता है?
डॉ. अरुण कुमार गोयल कहते हैं कि पेरिटोनियल कैंसर का व्यवहार उसके प्रकार और उस कैंसर पर निर्भर करता है जिससे वह शुरू हुआ है. कुछ टाइप धीरे-धीरे बढ़ते हैं, जबकि कुछ ज्यादा तेजी से बढ़ सकते हैं. जब कैंसर पेट की गुहा में फैलता है, तो वह पेरिटोनियम की अलग-अलग सतहों पर जमा होकर आंत, पेट, यकृत की सतह और अन्य आसपास के अंगों को प्रभावित कर सकता है. समय के साथ ट्यूमर का बोझ बढ़ने पर पेट में पानी जमा हो सकता है और आंतों पर दबाव पड़ने से बॉवेल ऑब्स्ट्रक्शन जैसी गंभीर समस्या भी हो सकती है.
क्या यह बहुत खतरनाक है?
पेरिटोनियम तक कैंसर का फैलना निश्चित रूप से गंभीर स्थिति है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर मरीज के लिए उपचार के विकल्प समाप्त हो जाते हैं. बीमारी का प्रकार, कैंसर कितना फैला है, मरीज की उम्र और सामान्य स्वास्थ्य तथा ट्यूमर को सर्जरी से कितना हटाया जा सकता है, इन सभी बातों के आधार पर उपचार की रणनीति तय की जाती है.
किन संकेतों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि पेट लगातार फूल रहा है, बार-बार पेट में दर्द या भारीपन हो रहा है, भूख कम हो रही है, बिना वजह वजन घट रहा है या पेट में पानी जमा होने जैसा महसूस हो रहा है, तो इसे केवल गैस या सामान्य पाचन समस्या मानकर लंबे समय तक टालना उचित नहीं है. खासकर ऐसे व्यक्ति जिनका पहले से पेट, आंत, अपेंडिक्स या महिला प्रजनन अंगों से संबंधित कैंसर का उपचार चल चुका है, उनमें नए पेट संबंधी लक्षणों की समय पर जांच महत्वपूर्ण है.

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