September 26, 2026

News Prawah

UDYAM-MP-49-0001253

MP Forest Rights Law News: ग्राम सभाओं के अधिकारों का हनन? केंद्रीय जनजातीय राज्य मंत्री ने मुख्यमंत्री से की PCCF निर्देश पर पुनर्विचार की अपील

भोपाल। मध्य प्रदेश में जनजातीय और वनवासी समुदाय के वैधानिक वन अधिकारों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक एवं राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक औपचारिक पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र में उन्होंने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF), मध्य प्रदेश द्वारा जारी 6 अगस्त 2026 के आदेश पर तत्काल पुनर्विचार करने और उसे वापस लेने की मांग की है। केंद्रीय मंत्री का तर्क है कि PCCF का यह निर्देश वन अधिकार अधिनियम, 2006 (FRA) और पेसा (PESA) नियमों के वैधानिक प्रावधानों के सीधे विपरीत है, जिससे ग्राम सभाओं के अधिकारों का हनन हो रहा है।

⚠️ PCCF के आदेश से उभरा विवाद: ‘केंद्रीय दिशानिर्देशों और कानून के खिलाफ हैं राज्य वन विभाग के निर्देश’

केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उइके ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि PCCF द्वारा जारी पत्र में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) और ग्राम सभा की वैधानिक भूमिका के संबंध में जो दिशा-निर्देश दिए गए हैं, वे पूरी तरह से कानून के अनुकूल नहीं हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा 27 जुलाई 2026 को एक संयुक्त डी.ओ. (D.O.) पत्र जारी किया गया था। राज्य वन विभाग का नया आदेश इन केंद्रीय दिशा-निर्देशों और वन अधिकार कानून के मूल उद्देश्यों से मेल नहीं खाता है, इसलिए इस विवादित आदेश को वापस लिया जाना या संशोधित किया जाना अत्यंत आवश्यक है।

🌳 केवल आरक्षित या संरक्षित वन होने से खत्म नहीं होते अधिकार: ग्राम सभा ही प्राथमिक सक्षम प्राधिकारी

संलग्नक दस्तावेजों का हवाला देते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि वन अधिकार अधिनियम (FRA) की धारा 6(1) के तहत ग्राम सभा ही सामुदायिक वन अधिकारों की प्रकृति और सीमा निर्धारित करने वाली प्राथमिक सक्षम प्राधिकारी है।

केवल किसी वन क्षेत्र का आरक्षित (Reserved), संरक्षित (Protected) या राष्ट्रीय उद्यान (National Park) होना वहां ग्राम सभा के CFR/CFRR दावों को समाप्त नहीं करता है। इसके अलावा, लघु वनोपज (Minor Forest Produce) के संग्रहण, उपयोग और स्वामित्व का पूर्ण अधिकार भी पेसा अधिनियम और FRA के तहत सीधे ग्राम सभाओं को ही प्रदत्त है।

🤝 राज्य और केंद्र मिलकर अपनाएं समन्वित दृष्टिकोण: ‘वन संरक्षण और वनवासियों के अधिकार साथ-साथ चलें’

केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आग्रह किया है कि राज्य सरकार के संबंधित विभाग इस विषय पर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ उचित समन्वय स्थापित करें।

उन्होंने जोर देकर कहा कि वन विभाग के वर्किंग प्लान और ग्राम सभा के सीएफआर (CFR) मैनेजमेंट प्लान के बीच बेहतर तालमेल होना आवश्यक है। मध्य प्रदेश में वन संरक्षण, सतत प्रबंधन और वनवासियों के वैधानिक अधिकारों को एक साथ संरक्षित करते हुए ही विकास को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

Share to...