भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को भरोसा दिलाया है कि मध्य प्रदेश के लोगों को सबसे सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश वर्तमान में सरप्लस बिजली वाला राज्य है। ग्वालियर-चंबल अंचल के मुरैना जिले में स्थापित सोलर इलेक्ट्रिसिटी स्टोरेज प्रोजेक्ट के जरिए राज्य को मात्र 2 रुपये 70 पैसे प्रति यूनिट की दर से सबसे सस्ती बिजली प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री भोपाल में आयोजित ऑल इंडिया डिस्कॉम्स एसोसिएशन की ‘नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण की किफायती विद्युत खरीद कार्यशाला’ को संबोधित कर रहे थे।
💡 खपत बढ़ने के साथ उत्पादन पर विशेष ध्यान: प्रदेश में अब तक लगाए जा चुके हैं 42 लाख स्मार्ट मीटर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, “राज्य सरकार प्रदेश के नागरिकों को सस्ती और सुलभ बिजली उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आधुनिक समय में हर क्षेत्र के विकास के लिए बिजली एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है।”
उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार बिजली की लगातार बढ़ती खपत के साथ-साथ इसके उत्पादन, ट्रांसमिशन और संधारण पर विशेष ध्यान दे रही है। प्रदेश में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए नई तकनीक के साथ आधुनिक इकाइयां शुरू की गई हैं। ऊर्जा विभाग ने तीव्र गति से योजनाओं को लागू कर क्षमता में विस्तार किया है और अब तक राज्य में लगभग 42 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। मध्य प्रदेश अब 24 घंटे अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) उत्पादन की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। CM ने डिस्कोम्स को अपना घाटा कम कर क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए।
🌿 पावर सेक्टर में मध्य प्रदेश ने बनाया नया रिकॉर्ड: नीमच-मंदसौर में स्थापित हो रहा 2000 मेगावाट का ग्रीन प्लांट
मुख्यमंत्री ने कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी के उत्पादन के मामले में मध्य प्रदेश अपने ही पुराने रिकॉर्ड खुद तोड़ता जा रहा है।
ग्रीन गो (Greenko) द्वारा नीमच-मंदसौर क्षेत्र में 2000 मेगावाट क्षमता का एक विशाल प्लांट स्थापित किया जा रहा है। यह पूरे देश का सबसे अनूठा और सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट होगा। उन्होंने बताया कि आमतौर पर इतनी बड़ी मेगा परियोजनाओं को पूरा होने में 4 से 6 वर्ष का लंबा समय लगता है, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार की त्वरित कार्यप्रणाली के कारण यह काम केवल 2 से 2.5 साल के भीतर पूरा किया जा रहा है।
📈 5,000 से बढ़कर 32,000 मेगावाट पहुंची बिजली क्षमता: कुल उत्पादन में 30% हिस्सेदारी अकेले ग्रीन एनर्जी की
राज्य सरकार बिजली उत्पादन में आने वाली हर चुनौती का समाधान करने के लिए तत्पर है।
ऐतिहासिक आंकड़ों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्य प्रदेश के गठन से लेकर वर्ष 2002-03 तक राज्य की कुल बिजली उत्पादन क्षमता मात्र 5,000 मेगावाट थी। हालांकि, निरंतर प्रयासों से आज प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़कर 32,000 मेगावाट तक पहुंच गई है। गर्व की बात यह है कि इस कुल क्षमता में लगभग 30 प्रतिशत की सीधी हिस्सेदारी अब पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन एनर्जी (Green Energy) की है।

More Stories
Madhya Pradesh Agriculture: सागर में उड़द और सोयाबीन की फसल सड़ने का खतरा; कलेक्टर ने दिए सर्वे के निर्देश
Gwalior News: गुवाहाटी छात्रा श्रुति उपाध्याय की मौत मामला; LNIPE छात्रों ने एडमिन ब्लॉक किया बंद, कुलगुरु ने लौटाई गाड़ी
MeitY Notification 2026: स्मार्टफोन स्क्रीन गार्ड पर सरकार की नई गाइडलाइंस, कंपनियों को मानना होगा IS 19348:2025 मानक