ग्वालियर। खराब सड़कों के लिए कुख्यात नगर निगम की सड़कों की गुणवत्ता फेल होने के बाद अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और लोक निर्माण विभाग (PWD) जैसी प्रमुख एजेंसियों की सड़कें भी तय मानकों पर खरी नहीं उतर पाई हैं। नगर निगम की सड़कों के बाद अब NHAI के अधीन आने वाली मेहरा टोल से सिकरौदा चौराहा मार्ग और PWD के अधीन एजी ऑफिस से विक्की फैक्ट्री मार्ग की सड़क के अधिकांश नमूने (सैंपल) जांच में फेल पाए गए हैं।
🏛️ मुख्य न्यायाधीश की युगलपीठ ने की सुनवाई: संबंधित विभागों को रिपोर्ट सौंपकर मांगा जवाब
शहर की सड़कों की गुणवत्ता को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने की। कोर्ट ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए गठित आयोग की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया और संबंधित विभागों को रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि वे ग्वालियर शहर के व्यापक हित में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
🚗 NHAI की सड़कों का नहीं मिला 6 माह का एनएसवी सर्वे: कोर्ट ने जताई नाराजगी
एनएचएआई के अधीन सड़कों की रिपोर्ट पर सुनवाई के दौरान आयोग ने कोर्ट को बताया कि नियमानुसार एनएचएआई को प्रत्येक छह माह में सड़क का अनकंबाइंड/असंयोजित सर्वे (NSV Survey) कराना अनिवार्य है।
हालांकि, जांच के दौरान ऐसा कोई दस्तावेज या रिकॉर्ड नहीं मिला जिससे यह प्रमाणित हो सके कि संबंधित सड़क का नेटवर्क सर्वे व्हीकल (NSV) द्वारा कभी सर्वे कराया गया था। कोर्ट ने एनएचएआई के अधिवक्ता को रिपोर्ट की प्रति सौंपते हुए इस पर जवाब दाखिल करने का समय दिया है।
✉️ सीलबंद लिफाफे में पेश हुई मूल जांच रिपोर्ट: हाई कोर्ट ने दिए छायाप्रति उपलब्ध कराने के निर्देश
18 सितंबर के पूर्व आदेश के अनुपालन में सोमवार को राजनंदिनी एंटरप्राइज एंड कंसल्टेंसी की मूल जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई।
अधिवक्ता गौरव मिश्रा ने सीलबंद लिफाफे में बिटुमिन टेस्ट रिपोर्ट और डिजाइन मिक्स (DBM) टेस्ट रिपोर्ट प्रस्तुत की। कोर्ट रूम में सीलबंद लिफाफे को खोला गया और कार्यालय को निर्देश दिए गए कि दोनों दस्तावेजों की फोटोकॉपी सड़क जांच आयोग को उपलब्ध कराई जाए, जबकि मूल दस्तावेजों को पुनः सीलबंद कर सुरक्षित रखा जाए।
🛠️ नगर निगम को पैचवर्क दुरुस्त करने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम: तकनीकी मानकों का पालन जरूरी
नगर निगम की ओर से अधिवक्ता ने सड़क पर किए गए पैचवर्क को सही ठहराने की कोशिश की, लेकिन नमूने लेने के लिए खोदे गए गड्ढों को तकनीकी मानकों के अनुसार भरने के लिए 24 घंटे का समय मांगा।
हाई कोर्ट ने निगम को 24 घंटे की मोहलत देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि आयोग द्वारा खोदे गए सभी हिस्सों का पैचवर्क 150 मिलीमीटर की गहराई तक निर्धारित तकनीकी विनिर्देशों (Specifications) के अनुसार ही पूरा किया जाए।
🏙️ स्मार्ट सिटी की सड़कों की स्थिति पर भी उठे सवाल: याचिकाकर्ता को आवेदन में संशोधन का समय
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने स्मार्ट सिटी की सड़कों की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठाया और स्मार्ट सिटी ग्वालियर के सीईओ को मामले में पक्षकार बनाने की मांग की।
सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि स्मार्ट सिटी के नियंत्रण वाली सड़कों से अभी तक नमूने नहीं लिए गए हैं। चूंकि इस बिंदु का उल्लेख अंतरिम आवेदन में नहीं था, इसलिए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आवेदन में आवश्यक संशोधन करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया।
🚫 हर सड़क के लिए जनहित याचिका का दायरा बढ़ाना संभव नहीं: हाई कोर्ट ने खारिज किया हस्तक्षेप आवेदन
सचिन तेंदुलकर मार्ग से भगवान सिंह माथुर सिटी एन्क्लेव को जोड़ने वाली सड़क की खराब हालत को लेकर दाखिल एक अन्य हस्तक्षेप आवेदन को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि नगर निगम को पूरे ग्वालियर शहर की सड़कों के निर्माण व मरम्मत की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है। कोर्ट के लिए यह संभव नहीं है कि वह शहर की हर एक व्यक्तिगत सड़क के लिए अलग-अलग जांच आयोग गठित करे।
👏 सड़क जांच आयोग के काम की हाई कोर्ट ने की सराहना: कड़ी मेहनत और निष्पक्ष जांच को सराहा
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सड़क जांच आयोग (अध्यक्ष गौरव समाधिया, सदस्य पवन रघुवंशी और हिमांशु शर्मा) के काम की विशेष रूप से प्रशंसा की।
कोर्ट ने कहा कि आयोग के सदस्यों ने केवल मौके पर जाकर 12-12 घंटे तक कड़ी धूप और परिस्थितियों में नमूने ही नहीं लिए, बल्कि तकनीकी पहलुओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों को समझने के लिए भी काफी मेहनत की है। शहर के हित में आयोग का यह कार्य अत्यंत सराहनीय है।
🍷 सिकरौदा में हाईवे से सटी शराब दुकान पर भी कोर्ट सख्त: 500 मीटर के नियम का पूछा हिसाब
सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष गौरव समाधिया ने सिकरौदा चौराहा स्थित शराब दुकान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि नियमानुसार हाईवे से शराब दुकान कम से कम 500 मीटर दूर होनी चाहिए, लेकिन यह दुकान हाईवे के बिल्कुल नजदीक संचालित हो रही है।
दुकान पर प्रदर्शित टैगलाइन का भी जिक्र किया गया। इस पर शासकीय अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा। कोर्ट ने शासन से पूछा है कि किन परिस्थितियों में यह लाइसेंस जारी किया गया और इसे कब तक स्थानांतरित किया जाएगा।

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