विदिशा। शहर के प्रसिद्ध वात्सल्य स्कूल में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की स्थापना अत्यंत गर्मजोशी और पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ की गई।
ढोल-ताशों की गूंज और ‘गणपति बप्पा मोरया’ के गगनभेदी जयकारों के साथ पूरा विद्यालय परिसर गणेशमय हो गया। भगवान श्री गणेश के आगमन पर विद्यार्थियों और गणमान्य अतिथियों द्वारा भव्य पुष्पवर्षा की गई। इसके उपरांत छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर लेझिम, ढोल-ताशा और भक्ति नृत्यों की ऐसी मनमोहक प्रस्तुतियां दीं कि उपस्थित दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
🦚 राष्ट्रीय पक्षी ‘मोर’ थीम पर सजावट और प्रस्तुतियां: अहिल्याबाई होलकर के जीवन पर प्रस्तुत होगी 17 मिनट की नाटिका
इस वर्ष वात्सल्य स्कूल के गणेशोत्सव का मुख्य आकर्षण भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय प्रतीकों और सामाजिक जागरूकता पर आधारित कार्यक्रम हैं।
इस बार का पूरा महोत्सव ‘राष्ट्रीय पक्षी मोर’ की विशेष थीम पर आधारित है, जिसके अनुसार ही विद्यार्थियों की ड्रेसेस और पंडाल की सजावट तैयार की गई है। गणेशोत्सव के दौरान लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर के जीवन एवं महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित 17 मिनट की विशेष नाट्य नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। इसके अलावा भगवान विष्णु के दशावतार, कबीर व गुरु नानक के विचार, और राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय पुष्प, राष्ट्रीय वृक्ष तथा राष्ट्रीय पशु जैसे प्रतीकों के माध्यम से राष्ट्रीय अखंडता का संदेश दिया जाएगा।
🎨 भोपाल के प्रसिद्ध कलाकार कार्तिकेय ने बनाई मिट्टी की ईको-फ्रेंडली प्रतिमा: पर्यावरण संरक्षण का दिया गया संदेश
वात्सल्य स्कूल में आयोजित गणेश महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना है।
भगवान श्री गणेश की भव्य प्रतिमा भोपाल के प्रसिद्ध मूर्तिकार कार्तिकेय द्वारा विशेष रूप से शुद्ध माटी से तैयार की गई है। इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम की संपूर्ण सजावट और मोर थीम पर आधारित हस्तशिल्प का कार्य विद्यालय के ही शिक्षकों द्वारा पिछले ढाई महीने की कठिन परिश्रम और रचनात्मकता से खुद अपने हाथों से तैयार किया गया है।
👥 2000 से अधिक विद्यार्थियों ने दिखाई एकजुटता: स्कूल डायरेक्टर देवना अरोरा ने जताई खुशी
वात्सल्य स्कूल की डायरेक्टर देवना अरोरा ने आयोजन के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि “हमारी इस बार की नई थीम राष्ट्रीय पक्षी मोर पर आधारित है। मोर के मनमोहक स्वरूप के अनुसार ही सभी ड्रेसेस और डेकोरेशन तैयार किए गए हैं।
बाजार से रेडीमेड सामान खरीदने के बजाय पूरा डेकोरेशन और शिल्प कार्य हमारे शिक्षकों ने ढाई महीने की मेहनत से तैयार किया है। हमारे विद्यालय में 1500 सीनियर, 1000 जूनियर और 500 नंदनवन के बच्चे अपनी सहभागिता देते हैं। आज गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर पंडाल में लगभग 2000 बच्चे उत्साहपूर्वक उपस्थित रहे।”

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