October 1, 2026

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अवैध पैंगोलिन तस्करी का भंडाफोड़, स्कॉर्पियो छोड़कर फरार हुए तस्कर, पुलिस को बड़ी कामयाबी

जगदलपुर: बस्तर जिले के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में वन्यजीव तस्करी का एक बड़ा ही गंभीर मामला सामने आया है।

दरअसल दरभा थाना पुलिस ने तीरथगढ़ चौक पर वाहनों की नियमित जांच के दौरान एक संदिग्ध स्कॉर्पियो वाहन को रोकने का प्रयास किया।
लेकिन पुलिस को देख तस्कर वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने वाहन की तलाशी लेने पर इसमें लगभग 10 किलोग्राम पैंगोलिन बरामद किया।

पैंगोलिन एक संरक्षित और दुर्लभ वन्यजीव है, जिसकी तस्करी वन्यजीव संरक्षण कानून (Wildlife Protection Act, 1972) के तहत गंभीर अपराध मानी जाती है। वन्यजीव की तस्करी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर अपराध है और इसके लिए सख्त दंड निर्धारित है।

दरभा थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत वन विभाग को सूचित किया। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बरामद पैंगोलिन को कब्जे में लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी। वन विभाग की टीम ने बताया कि तस्करी रोकने के लिए लगातार सघन निगरानी और अभियान चलाए जा रहे हैं। तस्करों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ-साथ फरार अपराधियों की खोज के लिए आसपास के क्षेत्रों में सघन सर्च ऑपरेशन भी शुरू कर दिया गया है।

पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई से यह संदेश गया कि वन्यजीवों की तस्करी पर शून्य सहनशीलता बरती जाएगी। पैंगोलिन की तस्करी का यह मामला न केवल क्षेत्रीय बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय है। वन्यजीव संरक्षण कानून के अनुसार अवैध रूप से किसी भी संरक्षित प्रजाति को पकड़ना, रखना या बेचना अपराध है और दोषियों को जेल की सजा और भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र वन्यजीवों की सुरक्षा और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र में वन्यजीव तस्करी की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि पैंगोलिन की तस्करी रोकने के लिए क्षेत्र में विशेष निगरानी बढ़ाई जा रही है और स्थानीय लोगों से भी वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करने की अपील की गई है। वन विभाग ने कहा कि तस्करों के खिलाफ जल्द ही सख्त कार्रवाई की जाएगी और पकड़े गए पैंगोलिन को संरक्षित केंद्रों में सुरक्षित रखा जाएगा। वन्यजीवों की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए पुलिस और वन विभाग का संयुक्त अभियान लगातार जारी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि तस्करी के मामले में समय पर सूचना और सतत निगरानी से ही इस तरह के अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

जगदलपुर में इस घटना से यह स्पष्ट संदेश गया कि वन्यजीव संरक्षण कानून के उल्लंघन करने वालों के लिए प्रशासन किसी भी स्तर पर सख्त कार्रवाई करेगा। साथ ही यह नागरिकों के लिए भी चेतावनी है कि किसी भी वन्य जीव की तस्करी या अवैध गतिविधियों में संलिप्त होना गंभीर अपराध है।

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