उज्जैन(डॉ हीना तिवारी): आज शनिश्चरी अमावस्या के पावन पर्व पर उज्जैन के शिप्रा नदी के त्रिवेणी घाट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालु रात 12 बजे के बाद से ही घाट पर पहुंचने लगे थे। स्नान के बाद उन्होंने शनि देव और नवग्रहों की पूजा-अर्चना की। हालांकि, बारिश के कारण प्रशासन ने घाटों पर फव्वारे लगाए, जिनमें स्नान करके श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था की डुबकी लगाई।
शनिचरी अमावस्या के अवसर पर उज्जैन के प्रसिद्ध नवग्रह शनि मंदिर को फूलों से सजाया गया। शनि महाराज का विशेष श्रृंगार कर उन्हें राजा के रूप में पगड़ी पहनाई गई। ऐसी मान्यता है कि अमावस्या के दिन इस मंदिर में डुबकी लगाकर दर्शन करने के बाद श्रद्धालु पनौती के रूप में अपने पुराने कपड़े और जूते-चप्पल यहीं छोड़कर चले जाते हैं।
यह माना जाता है कि शनिचरी अमावस्या पर स्नान के बाद कपड़े और जूते-चप्पल दान में छोड़ने से पनौती दूर होती है। त्रिवेणी घाट पर देशभर से आए श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में कपड़े और जूतों का ढेर लगा दिया है। हालांकि, प्रशासन इन दान में छोड़े गए सामानों की नीलामी करेगा।
शनि मंदिर के पंडित राकेश बैरागी के अनुसार, अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध का भी विधान है। इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व होता है। पंडित ने बताया कि शनिवार को अमावस्या पड़ने के कारण शनि देव की पूजा करने से विशेष शांति मिलती है। जिन लोगों पर शनि की साढ़े साती चल रही हो, या जिन्हें पितृ दोष, कालसर्प योग या अन्य कठिनाइयां हों, उन्हें इस दिन शनिदेव की पूजा से विशेष लाभ मिलता है। आज जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा श्रद्धालुओं की सुगम दर्शन व्यवस्था की गई है जगह-जगह पर बैरिकेट्स और सीसीटीवी लगाकर आसानी से लोगों को दर्शन हो ऐसी व्यवस्था हुआ है। रात 12:00 से शुरू हुए दर्शन व्यवस्था में अब तक 50000 से ज्यादा श्रद्धालुओं ने शनिदेव के दर्शन किए हैं। लगातार श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हो रहा हैं।

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