April 21, 2026

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गोवर्धन पूजा कब “आज” या “कल”??, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि सहित सबकुछ

हिन्दू धर्म में दीपावली पर्व के 1 दिन बाद गोवर्धन पूजा का आयोजन किया जाता है। यह पर्व प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण और गोवर्धन जी की उपासना का विधान है। इस दिन को अन्नकूट पूजा के नाम से भी जाना जाता है और इस दिन गेहूं, चावल, बेसन से बना भोजन पकाया जाता है और भगवान श्री कृष्ण को अर्पित किया जाता है।

आइए जानते हैं, गोवर्धन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि:

वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 1 नवंबर शाम 6:16 पर शुरू हो रही है और इसका समापन 2 नवंबर रात्रि 8:21 पर होगा। ऐसे में गोवर्धन पूजा का आयोजन 2 नवंबर 2024, शनिवार के दिन हो रहा है और इस दिन प्रातः पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6:35 से सुबह 8:45 के बीच रहेगा। वहीं संध्या पूजा के लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 3:25 से शाम 5:30 के बीच रहेगा और तीसरा मुहूर्त शाम 5 बजकर 35 मिनट से लेकर 6 बजकर 01 मिनट तक रहेगा।

गोवर्धन पूजा-विधि
गोवर्धन पूजा के दिन प्रातः स्नान-दान के बाद गाय, बछड़े और बैल की श्रद्धा भाव से पूजा करनी चाहिए। इसके बाद पूजा का आयोजन करना चाहिए। गोवर्धन पर्वत यदि घर के निकट नहीं है तो गोबर से बनी गोवर्धन जी की उपासना करनी चाहिए। उन्हें कंठ, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल, दक्षिण समर्पित करें और भगवान गोवर्धन को फल और दूध-मक्खन से बनी मिठाई अर्पित करें। भगवान गोवर्धन की उपासना के साथ-साथ भगवान श्री कृष्ण की भी उपासना करें और उन्हें भी चंदन, तुलसी, फूल इत्यादि अर्पित करें। पूजा के उपरांत में भगवान गोवर्धन की आरती के साथ पूजा संपन्न करें।

इस बार अन्नकूट और गोवर्धन पूजा 2 नवंबर, शनिवार को की जाएगी। गोवर्धन पूजा के दिन श्रद्धालु तरह-तरह की मिठाइयों और पकवानों से भगवान कृष्ण को भोग लगाते हैं। यही नहीं, इस दिन 56 भोग बनाकर भगवान कृष्ण को अर्पित किये जाते हैं और इन्हीं 56 तरह के पकवानों को अन्नकूट बोला जाता है। इस दिन मंदिरों में भी अन्नकूट का आयोजन किया जाता है।

गोवर्धन पूजा करने के पीछे धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण इंद्र का अभिमान चूर करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने भगवान इंद्र की पूजा न कर के गोवर्धन पर्वत की पूजा करवाई। इंद्र के कोप से ब्रज जलमग्न हो गया तो भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर गोकुल वासियों की इंद्र से रक्षा की थी। माना जाता है कि इसके बाद भगवान कृष्ण ने स्वंय कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन 56 भोग बनाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का आदेश दिया दिया था। तभी से गोवर्धन पूजा की प्रथा आज भी कायम है और हर साल गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का त्योहार मनाया जाता है।

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