April 19, 2026

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गांधी की यह बात उन्हें बनाती है औरों से अलग

गांधी, शायद ही भारत में कोई व्यक्ति ऐसा हो जो इस नाम से अपरिचित हो, जब भी हम महात्मा गांधी जी का नाम लेते हैं, तब हमें हमारे देश की आज़ादी का संघर्ष याद आ जाता है कि किस प्रकार उस समय उन्होंने हर वर्ग के व्यक्तियों को आज़ादी के संघर्ष से जोड़ा। जिस समय लोग जात-पात या धर्म पर लड़ने के लिए इकट्ठा होते थे, उस समय उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए सबको एक साथ जोड़ा

आज यानी 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर संपूर्ण विश्व में अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाया जाता है। क्योंकि महात्मा गांधी जी हमेशा सबको अहिंसा का संदेश दिया करते थे उनका कहना था कि “अहिंसा एक ऐसा शस्त्र है जिसके माध्यम से हम किसी भी लड़ाई को जीत सकते हैं”। इसीलिए उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन में हिंसा के विरुद्ध आवाज उठाई ताकि लोग किसी के साथ भी सभी प्रकार की हिंसा को त्याग दें और हमेशा अहिंसा को एक शस्त्र के रूप में उपयोग करें। जब भी हम महात्मा गांधी जी की बात करते हैं तो हमें भारत की आजादी के लिए उनका अभूतपूर्व योगदान याद आता है कि किस तरह उन्होंने सत्याग्रह और आंदोलनों द्वारा अंग्रेजी हुकूमत की नींव तोड़ी। इसके लिए उन्हें जेल तक जाना पड़ा पर फिर भी वह आजादी के लिए संघर्ष करते रहे। वैसे तो गांंधी जी ने सत्याग्रह की शुरुआत दक्षिण अफ्रिका में ही कर दी थी जहाँ उन्होंने रंगभेद के खिलाफ आवाज़ उठाई और उन्हें सफलता भी मिली। इसके बाद गांंधी जी भारत आकर सभी प्रकार के लोगों से मिलने लगे और उन्होंने लोगों की परेशानियों को समझकर उसके खिलाफ आवाज़ उठाना प्रारंभ कर दिया। भारत में गांंधी जी ने पहला आंदोलन 1917 मे बिहार के चंपारन मे शुरू किया और इसके बाद वह कई आंदोलनों और सत्याग्रहों द्वारा लोगों की समस्या का समाधान करने लगे। गांधी जी सभी क्रांतिकारियों से इसीलिए अलग थे क्योंकि वह समाज के हर वर्ग से जुड़े हुए थे, वह अपने आप को एक साधारण सी वेशभूषा में रखते थे ताकि सबके साथ मिलकर आजादी की ओर एक साथ कदम बढ़ा सकें। आज के समय में नई पीढ़ी को गांधी जी से अवगत होना चाहिए और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए ताकि वह भी देश के लिए निष्कृष्ट भावना से कार्य कर सके, बड़ी से बड़ी लड़ाईयों को हिंसा से नहीं बल्कि अहिंसा से जीत सके, किसी भी वर्ग में ऊंच- नीच का भाव ना रखें ।

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