हीना तिवारी,उज्जैन: विक्रम विश्वविद्यालय की हिंदी अध्ययनशाला एवं पत्रकारिता और जनसंचार अध्ययनशाला द्वारा विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। मॉरीशस में हिंदी और भारतीय संस्कृति : अतीत, वर्तमान और संभावनाएँ पर केंद्रित इस संगोष्ठी की अध्यक्षता विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अखिलेश कुमार पांडेय ने की साथ ही मुख्य अतिथि के रूप में मॉरीशस के विख्यात साहित्यकार डॉ उदयनारायण गंगू, धरमदेव गंगू, प्रेमिला सुरतन,राजवीर अवतार मॉरीशस मौजूद रहें।
विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि माॅरीशस एक मिनी भारत है। भारत से ज्यादा भारतीय संस्कृति का भरण-पोषण भारत के बाहर हो रहा है। हिन्दी साहित्य मातृ भाषा है वह हमारे गौरव, अस्मिता और संस्कृति का प्रतीक है।
मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद विख्यात साहित्यकार डॉ उदयनारायण ने कहा कि इतिहास की दृष्टि से पूराना देश नहीं है। उन्होंने का कहा कि तुफान बहुत आते हैं लेकिन वरदान के रूप में आते हैं। चीनी लोग माॅरीशस में व्यापार करने आए तो वह भी भोजपुरी भाषा में संवाद करने के लिए बाध्य थे। मैं उस धरती को नमन करने आया हूं जहां से मैंने हिन्दी पढ़ी। वहां जमीन खोदकर सोना तो नहीं निकला लेकिन लोगों ने खेती कर के सोना उगाया।
माॅरीशस के धरमदेव गंगू ने बताया कि भाषा रुपी पात्र में सभी चीजें संस्कृति, परम्परा और धरोहर समाहित थी। हिंदूस्थान अखबार मनिलाल डॉक्टर इसके संस्थापक थे। इसी प्रकार के कई समाचार पत्र प्रकाशित हुए। जिससे हिन्दी का विकास हुआ। जागृति समाचार पत्र ने लोगों के बीच जागरूकता फैलाने का काम किया। वहां जमीन खोदकर सोना तो नहीं निकला लेकिन लोगों ने खेती कर के सोना उगाया।
इस अवसर पर प्रो. शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि माॅरीशस ने आज भी भारत की संस्कृति और परंपरा को संजोए रखा गया है। गंगा तलाब बनाया गया जिसे आज तीर्थ स्थान के रूप में पूजा जाता है। वहां पर काशी विश्वनाथ का मंदिर स्थापित है। माॅरीशस में भारतीय का हिस्सा बसता है। अफ्रीका की दूसरी बड़ी अर्थ व्यवस्था माॅरीशस है।
कवयित्री प्रेमिला सुरतन ने देश भक्ति से ओतप्रोत कविताएं सुनाई। राजवीर अवतार ने भावनाओं से जुड़े भारत पर अपनी बात कहीं। उन्होंने कहा कि अधुरे शब्द माॅरीशस है और भारत उस अधुरे शब्द को पूरा करता है। आधे शब्द के आगे और पीछे वाले शब्द उसे पूरा करते हैं। मॉरीशस के हिंदी सेवियों का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में मॉरीशस के हिंदी सेवियों विख्यात साहित्यकार डॉ उदयनारायण गंगू,धरमदेव गंगू का शॉल,श्रीफल व साहित्य से सम्मान किया गया।
इस अवसर पर सुशील कुमार शर्मा, अजय शर्मा, हीना तिवारी, डॉ राजेश रावल ‘सुशील’, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जगदीशचंद शर्मा ने किया वही आभार प्रतिष्ठा शर्मा ने माना।

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